डीईओ ने दबाया जांच प्रतिवेदन, कलेक्टर तक नहीं पहुंची फाइल

कलेक्टर के निर्देशन में गठित टीम पहुंची थी जांच करने
रीवा। पूर्व वी.आर.सी.सी प्रवेश तिवारी द्वारा अपने कार्यकाल में कार्यालय की गई सामग्रियाँ जैसे एल.ई.डी, साउंड सिस्टम, खेल सामग्री जैसे बड़े-बड़े सामान नदारद कर अपने घर उठा ले गए थे । जिसका खुलासा डीपीसी कार्यालय के वित्त अधिकारी ने अपने जांच के दौरान किया था। मामला समझते हुए जिला कलेक्टर रीवा ने रीवा डीईओ को जांच के लिए निर्देशित किया तब डीईओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति भेजकर रीवा बीआरसी कार्यालय मैं उक्त मामले की जांच करवाई जांच समिति ने स्टाक-स्टोर मिलान मिलान किया, प्रवेश तिवारी द्वारा नए सामान के बदले टूटी फूटी एलईडी जमा की गई का अवलोकन किया । कार्यालय के कर्मचारियों का पंचनामा तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी रीवाा को सौंपा।
वहीं दूसरी ओर वर्तमान रीवा बीआरसी प्रवीण शुक्ला के विकलांगता प्रमाण पत्र की शिकायत कमिश्नर रीवा के यहां की गई थी जिसकी जांच भी रीवा डीईओ द्वारा की गई जिसका जांच प्रतिवेदन अभी तक कमिश्नर रीवा को नहीं सौंपा गया।
दोनो ही जांच प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा वरिष्ठ कार्यालय को न सौपे जाने से तरह-तरह की चर्चाएं शिक्षा जगत में है।
आश्चर्य की बात है कि दोनों ही बीआरसी के जांच का प्रतिवेदन रीवा जिला शिक्षा अधिकारी राम नरेश पटेल ने अभी तक जिला कलेक्टर एवं संभागायुक्त के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया इसके पीछे उनकी क्या स्वार्थ है यह समझ से परे है आखिर वह एक दोषी एवं एक निर्दोषी कर्मचारी के प्रतिवेदन को दबाकर वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों गुमराह कर रहे को रहे है है दोषी पर उनकी मेहरबानी की वजह क्या है यह तरह-तरह के सवाल प्रवेश तिवारी के जांच प्रतिवेदन दबाने के पीछे जन्म ले रहे। यह उल्लेख करना भी आवश्यक होगा कि प्रवेश तिवारी जब रीवा बीआरसीसी के पद पर पदस्थ थे तो आर्थिक अनियमितताओं में दोषी पाए जाने पर दो वेतन वृद्धि एवं पद से हटाया गया था।



