मण्डला दर्पणमध्य प्रदेश

विद्यालयों में चल रही मनमानियों पर पोलखोल मिशन चलाएंगे अतिथि शिक्षक : पी.डी.खैरवार

मंडला। मंडला  जिले का अतिथि शिक्षक परिवार शासन प्रशासन की गोलमोल शिक्षा व्यवस्था एवं शासन की शिक्षा नीति को मनमानी तरह से क्रियान्वित करने वाले विद्यालयों व कार्यालयों के खिलाफ पोल खोल मिशन पर काम करने का मन बना लिए हैं। साथ ही इस संदेश को जन जन तक पहुंचाकर शासन की दोषपूर्ण शिक्षा नीति से समाज को हो रहे भारी नुकसान का सामना करने समर्थन मांगने का भी काम करेंगे।
जिले के शिक्षा प्रशासन और विद्यालयों की कपटी नीतियों से तंग आकर यह निर्णय मंडला जिले के अतिथि शिक्षक संगठन अध्यक्ष एवं अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्य प्रदेश के संस्थापक पी.डी खैरवार के नेतृत्व में 2 अगस्त को जिला मुख्यालय में संगठन के पदाधिकारियों की संपन्न हुई विचार मंथन सभा में लिये गये हैं।
सभी विकास खंडों से पहुंचे संगठन के पदाधिकारियों ने संकुल एवं विद्यालय स्तर पर चल रही मनमानियों को लेकर उप संचालक शिक्षा विभाग मंडला सेंद्राम जी एवं आयुक्त आदिवासी विकास विभाग तेकाम से मुलाकात की है।
सहायक आयुक्त के नाम लिखे ज्ञापन सौंपते हुए गहन चर्चा भी की गई है। चर्चा के दौरान अनेकों विसंगतियां सामने आईं। कि शासन स्तर से आदेश कुछ और जारी किये जाते हैं।जिला और विद्यालय स्तर तक पहुंचते-पहुंचते शासन के आदेशों का पोस्टमर्टम कर घर घूले का खेल बना दिया जाता है।आगे जिसके मन में जो आया हाथ साफ करके निकल भी जाने का दौर वर्षों से बेलगाम बदस्तूर जारी भी है। पूर्व को नजरंदाज कर फी हाल की अगर बात की जाये तो जून 2021 तक का मानदेय दिए जाने कार्या.जनजातीय कार्य म.प्र. द्वारा दिनांक 6/7/21 को जारी पत्र क्रं./शिक्षा.स्था.4/402/भाग-2/2021/11214 में मानदेय भुगतान किये जाने का हवाला दिया गया है,परंतु जिला स्तर के अधिकारियों के कार्यालय से अधीनस्थ कार्यालयों तक पहुंचते इस तरह के आदेश बाप के राज के आदेश बनाकर रख दिये जाने का खेल बेखौफ जारी है।इन्हें इतनी भी सहानुभूति नहीं कि कोविड 19 काल के चलते अतिथि शिक्षकों का ही नहीं प्राय: सभी वर्गों का रोजगार 2 वर्षों से ठप्प पड़ा हुआ है। बावजूद इसके संस्था प्रभारियों की कार्यालयीन आवश्यकताओं के अनुसार अतिथि शिक्षक पढ़ाई कार्य, दस्तावेज संधारण कार्य तथा संस्थागत कार्यों को पूर्ण करने में बढ़चढ़कर सहयोग करते आ रहे हैं। जिनको बराबर मानदेय भी लेने का हक बनता है।इसके बाद भी शासन स्तर से मानदेय भुगतान करने जारी आदेश को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और मनमाने ढंग से किन अतिथि शिक्षकों को कितना मानदेय देना है, जिला अधिकारी और संस्था प्रधान आपस में साझा करके तय कर लेने का खेल जारी है। वहीं पर आसपास के जिलों के शिक्षा प्रशासन के द्वारा बहुतायत अतिथि शिक्षकों को जून तक का पूरा मानदेय भुगतान किये जाने का समाचार प्राप्त हो रहा है। जबकि मंडला जिले के अधिकांश अतिथि शिक्षक इन महीनों के मानदेय से वंचित चल रहे हैं। सभी को पता है,कि रोजी-रोटी की समस्या अतिथि शिक्षकों पर वैसे भी वर्षों से बनी हुई है,जो अब इस कारण के चलते और भी गहराते जा रही है।इसी तरह की दबावपूर्ण नीतियों का शिकार बनकर प्रदेश के सैकड़ों अतिथि शिक्षक मौत को तक गले लगा चुके हैं।
अतिथि शिक्षकों ने प्राथमिक से लेकर हायर सेकंडरी तक के अतिथि शिक्षकों को कोविड-19 मई 2020 से वर्तमान तक मानदेय भुगतान करने की मांग शासन से लगातार करते भी आ रहे हैं। जिसके एवज में राहत के रूप में यह आदेश जारी किया गया,परंतु शिक्षा प्रशासन की चाल तो शोषण को बढ़ावा देने की है।
दूसरा मामला यह कि हाई स्कूलों में कक्षा 10 तक वर्ग 2 के अतिथि शिक्षकों से पढ़ाई का काम कराए जाने की प्रक्रिया वर्षों से चलते आ रही है। वर्ग 2 पर ही नियुक्ति देकर अतिथि शिक्षकों से सेवाएं ली जाती रही हैं।जबकि सहायक आयुक्त कार्यालय मंडला से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2016/17 में जारी शासन के आदेश के अनुसार हाई स्कूलों में भी हायर सेकेंडरी की तरह वर्ग 1 के अतिथि शिक्षकों की भर्ती किये जाने की बात की जा रही है। इस तरह वर्ग 1 के योग्ययताधारियों से वर्ग 2 पर काम करा कर 7000 प्रति महीने मानदेय का भुगतान किया गया है। जबकि वर्ग 1 की भर्ती करने पर 9000 नौ हजार रुपये मासिक भुगतान करना पड़ता।इस तरह अतिथि शिक्षकों का शोषण वर्षों तक चलता रहा है। यह संस्था प्रभारियों की मनमानी का ज्वलंत नमूना है। 2016 से 2018 दो वर्ष एक हजार प्रति माह और 2018 से अब तक दो हजार प्रति महिना का नुक़सान अतिथि शिक्षकों को कराते संस्था प्रभारी आ रहे हैं।इस तरह और भी अनगिनत विसंगतियां जिले के उच्च अधिकारियों से मुलाकात के बाद सामने आई हैं। इन सारी मनमानियों को और भी उजागर करने का मन अतिथि शिक्षक परिवार मंडला ने बना लिया है। सर तरह से सैंया का राज बनाकर शासन की योजनाओं को पलीता लगाते क्रियान्यवयन करने वाले आला संस्थाओं की पोल खोलने की मुहिम बहुत ही जल्द चलाकर अतिथि शिक्षकों के अलावा आमजन तक यह छल-कपट से अटे पड़े कारनामों को उजागर करने संदेश दिया जायेगा।
आज दो ज्ञापन एक साथ सौंपे गये हैं। स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग मंडला के नाम संबोधित किया गया है। जिसमें मांग की गई है,कि प्राथमिक से हायर सेकंडरी तक के सभी अतिथि शिक्षकों को कोविड 19 काल के मानदेय सहित जून तक मानदेय जल्द भुगतान किया जाये। नियमितीकरण का इंतजार कर रहे वर्ग,3,वर्ग 2 तथा वर्ग 1 के सभी कार्यानुभवी अतिथि शिक्षकों को छात्र और अतिथि शिक्षक हित को ध्यान में रख स्कूलों के पिछले पैनल अनुसार जल्द भर्ती की जाये।महाराजपुर संकुल के अंतर्गत बुढ़ार हाई स्कूल का हवाला देते हुए मांग की गई है कि हाई स्कूल में पिछले सत्र से लगे वर्ग 2 की योग्यता रखने वाले अतिथि शिक्षकों को वर्ग एक नहीं वर्ग दो पर भर्ती की जाये। जिनकी योग्यता वर्ग 1 की है,तो वर्ग 1 पर भर्ती की जाये।तथा नियमितीकरण की लंबित मांगों के जल्द निराकरण को लेकर सहायक आयुक्त के द्वारा मुख्यमंत्री के नाम ध्यानाकर्षण ज्ञापन सौंपा गया है।
ज्ञापन में मुख्य रूप से दुर्गा श्रीवास,उदय दारिया, महेंद्र सोनी, हेमंत जंघेला, अनुभव झारिया,हेमंत साहू,अंजू पटैल,राजू झारिया,संतोष भांवरे,दीपक नागोत्रा, विशाल पटैल,अंजना पटैल, विकास पटैल,असीम सिंगौर,कृष्ण कुमार वल्के, राजेश पाटले, जगदीश बघेल,हेमंत सोनवानी सहित बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक पदाधिकारी सामिल रहे।

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