धन्य है देश की धरती जो इन नासमझो को भी पाल रही

रीवा। देश के लिए साल में दो अवसर सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है इनमें स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस 26 जनवरी शामिल हैं। स्वतंत्रता दिवस का आयोजन देश भर में शनिवार को सादगी पूर्ण तरीके से किया गया। कोरोनावायरस महामारी के भय के बीच सुरक्षा और सोशल डिस्टेंस के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। विंध्य प्रदेश में तीन ऐसे नजारे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामने आए जिन्होंने देश की एकता और अखंडता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इन तीन नजारों में एक सांसद जैसे जनप्रतिनिधि घोर लापरवाही के साथ सामने आए हैं तो वहीं सतना जिले के बाबुपुर चौकी के प्रभारी की आलीशान फोटो चर्चाओं में बनी हुई है। जबकि तीसरा नजारा सबसे अधिक खतरनाक इसलिए है क्योंकि पिछले तीन साल से रीवा जिले की सिरमौर तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत दगवाम की प्राथमिक स्कूल में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण ही नहीं किया गया। हैरत इस बात पर होती है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस तरह की हद दर्जे की लापरवाही सामने आने के बाद भी शासन और प्रशासन मौनी बाबा बना हुआ है। भारत की धरती पर जन्म लेने वाले लोगों से कम से कम इतनी उम्मीद तो की जा सकती है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर पूरी सावधानी और जिम्मेदारी के साथ आजादी और गणतंत्र का त्योहार मनाया जाए। आखिर किस तरह से कोई बुद्धजीवी जूते और चप्पल पहन कर ध्वजारोहण जैसा महत्वपूर्ण काम कैसे कर सकते हैं।
ग्राम प्रधान और स्कूल प्रबंधक क्या लोकतंत्र के ऊपर
हमारे देश के लोकतंत्र को सबसे ऊपर माना गया है, इसके बाद भी लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने वाले मामलों में कोई कमी नहीं आती है। रीवा जिले की सिरमौर तहसील में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आने के बाद भी जिला प्रशासन साइलेंट मोड में बना हुआ है। सिरमौर तहसील की सीमा में पोस्ट कटकी के अंतर्गत ग्राम पंचायत दुगवमा आता है, यहां पर पिछले तीन सालों से देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा का अपमान किया जा रहा है। ग्राम पंचायत भवन और प्राथमिक स्कूल में पिछले तीन सालों से पंद्रह अगस्त और 26 जनवरी के मौके पर ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन ही नहीं कराया गया। जबकि समस्त सरकारी भवनों में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर पूरी जिम्मेदारी के साथ ध्वजारोहण कराना अनिवार्य रहता है। ग्राम प्रधान मीरा सिंह पति पुष्पेन्द्र सिंह और प्राथमिक स्कूल प्रभारी आभा दि्वेदी पति अरुण दि्वेदी की तानाशाही के कारण ही स्वतंत्रता दिवस शनिवार को पंचायत भवन और प्राथमिक स्कूल में ध्वजारोहण का आयोजन नहीं कराया गया। दबंग जनप्रतिनिधि होने की वजह से गरीब और परेशान गांव वालों की जुबान पर सच्चाई नहीं आ पाती है, लेकिन देश की आजादी और गणतंत्र दिवस के महत्वपूर्ण अवसर पर ध्वजारोहण न कराए जाने से ग्रामीण भी काफी असंतुष्ट हैं।
सिविल लाइंस सांसद आवास का नजारा आंखों में कैद
जहां सिरमौर तहसील के ग्राम पंचायत भवन और प्राथमिक स्कूल में तीन साल से देश के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो वहीं रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा का संभागीय मुख्यालय के सिविल लाइंस में मौजूद सरकारी आवास भी स्वतंत्रता दिवस के दिन सोशल मीडिया की सुर्खियों में छाया रहा। सांसद आवास में शनिवार को सुबह जब रीवा सांसद ध्वजारोहण करने के लिए आवास से निकलें तो अपनी वीआईपी चप्पल को उतारना जरूरी नहीं समझा। मोटे लेयर वाली चप्पल पहनकर सांसद जनार्दन मिश्रा ने ध्वजारोहण किया तो फोटो वायरल हो गई। क्या किसी भी जनप्रतिनिधियों को देश की आन बान और शान के प्रतीक तिरंगा फहराने के लिए चप्पल और जूते पहनने की विशेष राहत देश के कानून व्यवस्था में बनाई गई है। यदि नहीं तो फिर वीआईपी चप्पल पहने ध्वजारोहण करने वाले बेलगाम सांसद पर किसी तरह की कार्यवाही क्यों नहीं हुई।
सतना जिले की बाबुपुर चौकी में लाल जूतों की रौनक
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण जैसे अति महत्वपूर्ण काम को लेकर घोर लापरवाही का मामला सतना जिले की बाबुपुर चौकी में सामने आया है। बाबुपुर पुलिस चौकी में स्वतंत्रता दिवस शनिवार को ध्वजारोहण करने का दायित्व निभाने वाले चौकी प्रभारी जब ध्वजारोहण करने के लिए आगे बढ़े तो उनके पैरों में पुलिसिया जूते अपना जलवा बिखेर रहे थे। चौकी प्रभारी आवश्यक तैयारी पूरी होने के उपरांत साहब बाहर पुलिसिया जूतों को पहने हुए सीधे तिरंगा झंडा के सामने आ गये। चौकी प्रभारी ने जूतों को किनारे करने के बजाय उसे पहनकर ही ध्वजारोहण करना उचित समझा। हमारे देश की आन बान और शान के प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के प्रति मन मंदिर में आस्था का होना जरूरी है। लेकिन इक्कीसवीं सदी में जनप्रतिनिधियों और पुलिस विभाग जैसे विभाग के अधिकारियों ने अपने कारनामों से यह साबित कर दिया कि देश के राष्ट्रीय ध्वज के प्रति उनका क्या सर्मपण मन मंदिर में बना हुआ है।



