वीर सावरकर के विचारो और चितंन से भारत का होगा नव सृजन

जबलपुर दर्पण। मां भारती को समर्पित देशभक्त राजनीतिक छुआछूत के शिकार हुए जिससे भारत की वैचारिक क्षति हुई। मातृभूमि को मन मस्तिष्क सभी समर्पित करने के बाद ही राष्ट्र निर्माण का बीज अंकुरित होता है। वीर सावरकर ने सर्व समर्पित कर आवाहन किया था कि संगठित होकर ही हम देश को आतंरिक सुरक्षा दे सकते है, भारत को सुदृढ और सुसंस्कृत करने संगठित होकर प्रयास करना चाहिए। वीर सावरकर के विचार वर्तमान परिदृश्य मे भी सतत विकास और समृद्ध राष्ट्र के लिए आवश्यक है।राष्ट्र की आजादी के लिए वीर सावरकर ने अत्यन्त पीड़ादायक कष्टो को सहा और पूरा जीवन मां भारती की स्वातंत्र्य के लिए समर्पित कर दिया। उक्त ओजपूर्ण उदगार मुख्य वक्ता दीपक मोरेश्वर मुंजे, अध्यक्षता ब्रिगेडियर विपिन त्रिवेदी व वक्ताओ ने भारत रक्षा मंच महाकौशल प्रांत के तत्वावधान मे स्वातंत्र्य वीर सावरकर के जीवन परिचय, चितंन और ओजपूर्ण राष्ट्रवादी विचारो को आर्य समाज भवन बराट रोड मे वीर सावरकर जयंती समारोह की सभा मे व्यक्त किए ।
इस अवसर पर डा कृष्ण कांत चतुर्वेदी, प्रशांत पोल,डा एच पी तिवारी, योगेश अग्रवाल, सत्यप्रकाश यादव, डा श्रृध्दा तिवारी,जीवेश पांडे, डा राजेश जायसवाल, सिध्दार्थ शुक्ल, बल्लू भालेराव, योगेन्द्र दुबे, जगदीश दुबे , आनंद बर्नार्ड, आलोक अग्निहोत्री, रवि चौहान, विध्येश भापकर, जितेंद्र चांदोरकर, आशीष दुबे, राहुल शुक्ल, संजय भगत, गोपाल, निशांत बाजपेई, डा रोहित आचार्य, राम शंकर,नरेश चौधरी , अनिल दुबे, सचिन जैन,सहित
भारत रक्षा मंच की महिला मंडल की स्नेहा ज्योति सिंह, अर्चना गोस्वामी, नीलम शर्मा, नीता , मंजू, भारती जैन, श्रृध्दा झारिया, लक्ष्मी माकोडे, रत्ना दीक्षित, वाणी गुप्ता, सुषमा पासी, पारूल गुप्ता ने अतिथियो का स्वागत सत्कार पुष्प गुच्छ भगवा पट्टिका देकर किया। मंच संचालन मदन दुबे और आभार प्रदर्शन स्नेहा ज्योति सिंह ने किया।



