पाटन एसडीएम मो.शाहिद खान ने शकर भगवान को बताया नाबालिक:महादेव की बेशकीमती जमीन पर प्लाटिंग के दिए निर्देश

पाटन के बुद्धिजीवी वर्ग ने प्लाटिंग निरस्त करने:कलेक्टर से लगाई गुहार
पाटन नप्र ठा.राजेन्द्र सिंह/जबलपुर दर्पण। जिले की पाटन तहसील के गुरु मोहल्ला स्थित भोलेनाथ मंदिर को पूर्व में स्व हरवंश प्रसाद तिवारी ने अपनी निजी भूमि दान दी थी उनका उद्देश्य था उक्त भूमि की आय से भोले नाथ मंदिर में धार्मिक आयोजन, मंदिर के रखरखाव एवं मंदिर की सेवा करने वाले पुजारी और मंदिर के अन्य जरूरतों की पूर्ति हो सके। श्री शंकर जी महाराज ट्रस्ट का गठन कर उसका सारा लेखा जोखा पाटन नगर के जाने माने डॉक्टर राजकुमार व्योहार के पास था। जब तक वे जीवित थे तब तक मंदिर की प्रॉपर्टी सुरक्षित थी पाटन का दुर्भाग्य की कहे उनकी मृत्यु के पश्चात कुछ लालची लोगों की नजर मंदिर की बेशकीमती जमीन पर पड़ गई। आनन फानन में तहसील के राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से दिनांक 30/09/2021 को नए ट्रस्टी राजेंद्र सिंह,बगैरा, कुल भूमि का रकवा 2.973 हेक्टेयर जो लगभग 7.34 एकड़ के आस पास है। जिसमें से 89000 वर्गफुट भूमि एसडीएम कार्यालय भवन के लिए दान दी गई शेष 48000 वर्गगुट भूमि पर शंकर भगवान का मंदिर एवं पार्क के लिए सुरक्षित रखी गई। जिस पर पाटन नगर की जनता जनार्दन को कोई आपत्ती नही थी। लेकिन बाकी बची भूमि पर पाटन के माननीय ने योजनाबद्ध तरीके से अपने राजनैतिक रसूख की दम पर ट्रस्ट में सत्ता पक्ष के लोगो को नामनी बना कर, पाटन राजस्व विभाग के आला अधिकारियों के साथ मिलकर प्लाटिंग करने की अनुमति ली गई तर्क दिया गया चुकी श्री शंकर जी महाराज नाबालिक की श्रेणी में आते है इसलिए उनके सारे फैसले पाटन एसडीएम को करना है चुकी मामला तकरीबन 10 से 12 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का था और पाटन एसडीएम मो.शाहिद खान एवं राजस्व विभाग के आला अधिकारीयों ने भी करोड़ों रुपए इस गोल माल में बारे न्यारे कर लिए यही वजह थी जिनकी जन्म भूमि पाटन थी जिनके पूर्वज ने हमेशा पाटन नगर को कुछ न कुछ दिया आज वे सभी बाहरी व्यक्ति के राजनैतिक आभा मंडल की चकाचौंध में देवों के देव महादेव भगवान के साथ गद्दारी कर पाप के सहभागी बन रहे है।
“आखिर क्यों माननीय पर पाटन नगर की जनता भरोसा करे” टीएनसीपी कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार 1226 फुट के 16 प्लाट, 1129 फुट के 32 प्लाट, 580 फुट के 5 प्लाट, एलआईजे 177 फुट के 5 प्लाट, ईडब्ल्यूएस 132 फुट के 5 प्लाट,55 दुकानें को सेल करने की योजना तैयार है।
बिक्री की शर्तों पर एक नजर- चुकी श्री शंकर जी महाराज नाबालिक की श्रेणी में आते है। जिसके कारण श्री शंकर जी महाराज के नाम से दर्ज जमीन को विक्रय करने या हस्तांतरण कराने का अधिकार जिला कलेक्टर को न होकर,कलेक्टर के द्वारा एसडीएम को लोक न्यास पंजीयक के अधिकार प्रत्यावर्तित किये गये है। जिसके कारक लोक न्यास पंजीयक के कार्य करने का अधिकार प्राप्त होने पर पाटन एसडीएम शाहिद खान द्वारा ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन न करते हुए राजनैतिक दवाब के चलते,राजस्व विभाग के अन्य आला अधिकारियों की मिलीभगत से मंदिर की बेशकीमती जमीन पर षड्यंत्र रचकर कानूनी दांवपेच की दम पर मन्दिर की जमीन पर प्लाट एवं दुकानों की बिक्री से आने वाले करोड़ों रुपए की हेरा फेरी का पूरा खाका तैयार किया गया है।
ट्रस्ट के उद्देश्य:- श्री शंकर जी महाराज ट्रस्ट पंजीकृत है जो वर्ष 1987 से लोक न्यास पंजी के 57 पर पंजीकृत है। ट्रस्ट के उद्देश्य पूजा अर्चना, साधु सेवा, धार्मिक उत्सव परमार्थिक कार्य एवं सामाजिक कल्याण कार्य है ।
तथाकथित लोगों ने भोलेनाथ शिव शंकर को बनाया बिल्डर्स :- पाटन राजस्व विभाग यदि अनुमति देता है तो ट्रस्ट की शेष भूमि में आवासीय प्लाट एवं व्यवसायिक दुकानें विकसित कर उससे होने वाली आय, ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा होगी प्रत्येक वर्ष की आय व्यय का लेखा-जोखा कर ऑडिट रिपोर्ट ट्रस्टी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी साथ ही गुरु मोहल्ला स्थित प्राचीन शंकर भगवान मंदिर के जीर्णोसार स्था-रखाव पूजा अर्चना एवं ट्रस्ट की भूमि पर भगवान शंकर जी की नवीन प्रतिमा/मंदिर को बनाने एवं लोक कल्याण के कार्यों, के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाएगा इसी आधार पर पाटन एसडीएम मो.शाहिद खान ने 89000 वर्गफुट भूमि मध्यप्रदेश शासन को दान करने की अनुमति दी शेष 47858 वर्गफुट भूमि पर मंदिर एवं पार्क निमाण की अनुमति प्रदान की एवं बाकी बची भूमि पर आवासीय एवं व्यवसायिक प्लाट एवं दुकानें विक्रय करने की अनुमति निम्न शर्तों के आधार पर दी,(1) आवासीय प्लाट की बिक्री से पूर्व दो दैनिक समाचार पत्रों में विक्रय का इश्तहार प्रकाशन किया जाए
(2) प्लाट का विक्रय कलेक्टर गाइड लाइन से कम पर नहीं किया जाय तथा विक्रय से प्राप्त राशि ड्राफ्ट अथवा ऑनलाइन राशि हस्तांतरण से ही प्राप्त की जाय जबकि पाटन में कलेक्टर गाइड लाइन से अधिक का रेट है विकसित कालोनी कम से कम दो हजार रुपए से लेकर पच्चीस सौ रुपए फुट से अधिक की दर से विक्रय होने का अनुमान है।
(3) ट्रस्ट द्वारा व्यवसायिक दुकाने किराये पर दी जाती हैं तो किरायानामा का एग्रीमेंट कराना होगा तथा प्रतिवर्ष बाजार दर के अनुसार किराया निर्धारण किया जायेगा
हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करने विद्युत विभाग ने दी सहमति-यह माननीय का रसूख ही कहें कि शंकर जी महादेव ट्रस्ट की भूमि से हाईटेंशन लाइन निकली है जिसे निजी स्वार्थ के चलते एवं कमर्शियल मार्केट साथ ही प्लाटिंग की योजना को देखते हुए हाई टेंशन लाइन को शिफ्ट करने विद्युत विभाग पर दबाव बनाकर सहमति ली गई यह आम आदमी के बस की बात तो है नहीं कि वह अपने खेत की हाई टेंशन लाइन शिफ्ट करवा सके, इस तरह के कार्य तो माननीय ही करा सकते हैं। जिससे पाटन नगर में विकास की गंगा बह सके। अब विकास किसका होगा यह तो समय बताएगा।
मीडिया से चर्चा के दौरान नगर के बुद्धजीवी वर्ग ने अंदेशा जताया कि यह सारा खेल मंदिर की बेसकीमती जमीन को खुर्द बुदुर्ग करने का है। यह जमीन स्व हरवंश प्रसाद तिवारी ने अपनी निजी भूमि शकर जी महाराज के मंदिर की सेवा के लिए दान दी थी न की व्यवसायिक उद्देश्य की पूर्ति कर लाभ अर्जित करने दी थी। पाटन एसडीएम द्वारा श्री शंकर जी महाराज को नाबालिक बता कर करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन का खेला करने में राजस्व विभाग के अधिकारियो ने भी करोड़ों रुपए की रिश्वत लेकर बारे न्यारे कर लिए। प्रकरण को जिला कलेक्टर स्वत: संज्ञान लेकर तुरंत जांच के निर्देश जारी करे साथ ही नगर परिषद पाटन, विधुत विभाग पाटन, राजस्व विभाग पाटन, टी एनसीपी विभाग के लापरवाह अधिकारियो पर सक्त कार्यवाही कर प्लाटिंग की परमिशन को तत्काल निरस्त कर जो भी अधिकारी कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं उन सभी पर 420 का प्रकरण दर्ज कराकर भविष्य में शासन द्वारा जनहित में होने वाले कार्य के लिए उक्त भूमि शासन के मद में अधिग्रहण करे जिससे लालची लोगों के मंसूबो पर पानी फेरा जा सके।




महादेव भोलेनाथ भक्त मंडली जल्द ही पूरे प्रकरण को कानून के जानकारों से राय लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेगी जिससे शंकर जी महादेव ट्रस्ट की भूमि को बंदरबांट होने से बचाया जा सके।



