संपादकीय/लेख/आलेखसाहित्य दर्पण

विचारवान साहित्यकार “किसलय”

(5 फरवरी को जन्म दिवस पर विशेष)

“किसलय जग में श्रेष्ठ है, मानवता का धर्म अहम त्याग कर जानिए, इसका व्यापक मर्म” दो पंक्तियों में जीवन की राह और मंजिल बता देने वाले भाई विजय तिवारी “किसलय” का नाम हिंदी भाषा के जानकार गंभीर और विचारवान साहित्य साधकों में शामिल है । उनका विशाल शब्द भंडार उनकी व्यापक -दृष्टि के सटीक शब्द-चित्र बनाता है । अत्यंत विनम्र किन्तु स्वाभिमानी “किसलय” जी ने एम.ए., एम.बी.ई.एच., पी.जी. डिप्लोमा पत्रकारिता की उपाधियाँ प्राप्त की हैं । वे मध्य प्रदेश विद्युत मंडल में शासकीय दायित्व निभाते हुए भी निरंतर साहित्य सृजन में रत रहे । विजय तिवारी ने कविताएँ, गीत, ग़ज़ल, दोहा, कहानियाँ, लघु कथाएँ, समीक्षाएँ, भूमिकाएँ, लेख, निबंध आदि तो लिखे ही हिंदी व्याकरण व छन्दों पर विशेष कार्य किया। किसलय के काव्य सुमन (काव्य संग्रह), किसलय मन अनुराग (दोहा कृति) उनकी प्रकाशित चर्चित पुस्तकें हैं। देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाओं का निरंतर प्रकाशन हो रहा है। आकाशवाणी केंद्रों से भी हमें अक्सर उनकी रचनाएँ और विचार सुनने मिलते रहते हैं । मन-वचन से उदार किसलय जी नवोदित इच्छुक साहित्य साधकों को उचित परामर्श देने सदा तत्पर रहते हैं। वे विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हैं। ब्लाग लेखन, सोशल मीडिया, स्वयं की वेबसाइट पर सक्रिय हैं। उद्देश्यपूर्ण श्रेष्ठ साहित्य सृजन पर किसलय जी को “नई दुनिया समाचार पत्र” ने जबलपुर साहित्य रत्न अलंकरण से सम्मानित किया है। नगर और प्रदेश-देश की अनेक संस्थाएँ भी उन्हें सम्मानित कर चुकी हैं। ज्ञान, अभिव्यक्ति-सौन्दर्य, विनम्रता, सहयोग, विश्वसनीयता, देशप्रेम जैसे गुणों से युक्त विजय भाई अपनी सारी उपलब्धियों का श्रेय अपने पिताश्री एवं गुरुजनों को देते हैं और उनका वंदन करते हुए समाज को उनके प्रति कर्तव्य बताते हैं- पुत्र वही जो पिता को खुशियाँ दे सर्वत्र सुख-दुख में जो ध्यान दे, सच्ची वही कलत्र

गुरु के लिए वे लिखते हैं-

स्वप्न सींचकर शिष्य में, सच करवाते आप पद वंदन गुरु आपका बनूँ आपकी छाप विजय तिवारी जी का जन्म दिवस भी इस वर्ष माँ वीणा वादिनी के जन्म दिवस आज वसंत पंचमी को ही है। अभिमान रहित श्री किसलय कहते हैं- “मूर्ख अकिंचन भक्त मैं, चरणों की हूँ धूल” । वे लोगों को मंत्र देते हैं- “सदाचार से निम्न भी बन जाते हैं श्रेष्ठ”। इन्हीं भावों के कारण किसलय जी भीड़ से अलग खास दिखाई देते हैं। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजकुमार ‘सुमित्र’ कहते हैं- “दोहा अति प्राचीन विधा है। विजय तिवारी ‘किसलय’ ने इस विधा के अस्तित्व से जुड़कर दोहों का सृजन किया है। इनके दोहे प्रेरणा का पराग हैं।” सुप्रसिद्ध साहित्यकार आचार्य भगवत दुबे लिखते हैं- “दोहा सृजन एक साधन है । यह शब्द संयोजन ही नहीं मंत्र जैसे शक्ति सम्पन्न होते हैं। दोहों की मात्राएँ और लयता का किसलय ने पूरा ध्यान रखा है।

किसलय जी की कलम इसी तरह चलती रहे। उनके जन्म दिवस पर सभी मित्रों, परिचितों, प्रशंसकों की ओर से उनके स्वस्थ, सुदीर्ध, यशस्वी जीवन के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएँ, बधाई।

  • प्रतुल श्रीवास्तव

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page