भाजपा सरकार की राजनैतिक चरित्र बन चुकी है न्यायालय केआदेशों की अवहेलनाः तरुण भनोत

जबलपुर दर्पण। पिछले दिनों जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स एसोसिएशन के सेवानिवृत्त कर्मियों का प्रतिनिधिमंडल से मिलने के क्रम में बताया गया कि शासन के आदेश क्रमांक – एफ-8/2009/नियम/4, दिनांक – 28.02.2009 के अंतर्गत कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त पेंशनधारियों को 01.01.2006 से छठवें वेतनमान के आधार पर पेंशन भुगतान के संबंध में आदेशित किया गया था, और वर्ष 2006 से लेकर वर्ष 2009 के तहत छठवें वेतनमान के अनुसार पेंशन का भुगतान और संशोधित राशि का भुगतान भी किया गया था, किन्तु वित्त विभाग के द्वारा अचानक दिनांक – 13.11.2017 को जारी आदेश के तहत पिछले 10 वर्षों से छठवें वेतनमान के आधार पर पेंशन का लाभ ले रहे है सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन को पुनः पांचवें वेतनमान के आधार पर कर दिया गया है | जबकि वर्तमान में शासन के अधीनस्थ सभी विश्वविद्यालय कर्मियों को छठवें वेतनमान के आधार पर पेंशन का भुगतान किया जा रहा है, किन्तु कृषि विश्वविद्यालय के पेंशनकर्मियों को पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन का भुगतान किया जा रहा है | उक्ताशय के उद्गार प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक श्री तरुण भनोत के द्वारा कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मियों की मांग को लेकर वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा को प्रेषित पत्र के माध्यम से व्यक्त किया गया है |
श्री भनोत ने वित्त मंत्री देवड़ा को प्रेषित पत्र के माध्यम से बताया कि छठवें से पुनः पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन किए जाने के शासनादेश के खिलाफ कृषि विश्वविद्यालय के पेंशनभोगियों द्वारा इस मामले में राहत पाने माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष इस विषय को लाया गया था, जिसपर सुनवाई के दौरान दिनांक – 20.12.2022 को माननीय न्यायालय द्वारा आदेशित किया गया कि शासन दिनांक 01.01.2006 के आदेश के आधार पर ही कृषि विश्वविद्यालय के पेंशनकर्मियों को छठवें वेतनमान के आधार पर पेंशन भुगतान के आदेश को यथावत रखा जाएं | किन्तु, उच्च न्यायालय के आदेश के लगभग सात माह बीत जाने के बाद भी कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त पेंशनधारियों के पेंशन को छठवें वेतनमान के आधार पर संशोधन नही किया गया है, जिससे पेंशनधारियों को आर्थिक क्षति पहुँच रही है |
श्री भनोत ने अपने पत्र के माध्यम से पेंशनधारियों की पीड़ा पर सवाल उठाते हुए बताया कि यह कैसे संभव है कि पांचवें से छठवें वेतनमान के तहत शासन द्वारा आदेश किया जाता है, आदेश के अनुसार पेंशनकर्मियों को पिछले 3 वर्षों के बकाया राशि के साथ लगभग 10-11 वर्षों तक छठवें वेतनमान के तहत पेंशन का भुगतान किया जाता है और अचानक शासन के दूसरे आदेश से वेतनमान को छठवें से पुनः पांचवें में कर दिया जाता है ? पेंशनकर्मी 65-70 वर्ष की आयु में समय और पैसा लगाकर माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष गुहार के बाद अंततः 5-6 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद पेंशनकर्मियों के पक्ष में फ़ैसलें के बाद भी पिछले 8 महीनों से न्यायालय के आदेश का अनुपालन नही किया जाना निःसंदेह न्यायालय के तमाम आदेशों की अवहेलना भाजपा और शिवराज सरकार की असल राजनैतिक चरित्र को दर्शाता है |



