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गुजरात और महाराष्ट्र सरकार की तरह मध्यप्रदेश शासन भी व्यापारियों को राहत दे।

गुजरात और महाराष्ट्र सरकार की तरह मध्यप्रदेश शासन भी व्यापारियों को राहत दे।

मध्य प्रदेश शासन से जबलपुर आफ चेम्बर आफ काॅमर्स ने उठाई माँग।

जबलपुर। कोविड-19 के चलते लाक डाउन लगा और पूरे देश के व्यापारी वर्ग का बजट, डावाडोल हो गया। खर्चे पहले की तरह है,लेकिन आमदनी लगभग शून्य हो गई। दोबारा व्यापारी वर्ग को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए, समय के साथ-साथ, सरकार के सहयोग की भी आवश्यकता है। और इसी सहयोग की अपेक्षा से,जबलपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स केंद्र और राज्य सरकारों से सहयोग करने की मांग उठाई है।
जबलपुर चेम्बर आफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री ने मध्य प्रदेश शासन से मांग की है। कि गुजरात व महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर,कोरोना काल में ठप्प पड़े उद्योग-व्यापार को सहारा देने आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। एक जानकारी में जबलपुर चेम्बर के चेयरमेन प्रेम दुबे ने बताया कि वर्ष 2020 से अभी तक कोरोना काल में व्यापार व उद्योग समूचे देश का प्रभावित हुआ है। जिससे व्यापारियों को खर्चे निकालना भी मुशिकल हो रहा है। वहीं विभिन्न विभागों के द्वारा रोपित करों के बोझ से भी व्यापारी वर्ग मुसीबत में है। उन्होंने कहा शासन को चाहिए कि वह व्यापारी वर्ग के हितार्थ आर्थिक सहायता प्रदान करे। क्योंकि यह टैक्स का ही पैसा है। जिससे व्यापारी वर्ग सहायता की अपेक्षा रखता है।
प्रापर्टी टैक्स -जबलपुर चेम्बर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हिमाँशु खरे ने मांग की। कि नगर निगम पूरे प्रदेश में उद्योग एवं व्यापार के क्षेत्र में, एक वर्ष के प्राॅपर्टी टैक्स में छूट दे। पिछले डेढ़ वर्ष से, अधिकांश दुकानों में ग्राहकी कम रही है तथा लाकडाउन से भी विपरीत असर पड़ा है। जिसके कारण रिटेल, होटल, रेस्टाॅरेंट, रिसाॅर्ट, जिम आदि बंद होने की कगार में हैं। लाखों कर्मचारी बेरोजगार हो रहे हैं। व्यापारी वर्ग अपनी मासिक किश्त भी सरलता से बैंकों को नही दे पा रहें है। उन्होंने बताया कि हाल ही में गुजरात सरकार ने व्यापारिक एवं औद्योगिक इकाइयों में आर्थिक राहत दी है। मध्य प्रदेश सरकार को भी इस पर विचार करना चाहिए।
विद्युत शुल्क – चेम्बर के कार्यकारी अध्यक्ष कमल ग्रोवर ने प्रदेश में बिजली बिलों में व्यापारिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से एक वर्ष के लिए नियत शुल्क में छूट की मांग की है। उन्होंने कहा कि जितनी खपत उतना बिल के आधार पर विद्युत षुल्क वसूला जाए। इस तरह सरकार उद्योग और व्यापार की मदद कर सकती है।
स्टाम्प शुल्क – जबलपुर चेम्बर के राधेश्याम अग्रवाल, अमरप्रीत छाबड़ा, शशिकांत पाण्डेय आदि ने मांग की है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले गृह निर्माण के क्षेत्र को, संबल प्रदान करने पंजीयन शुल्क तथा स्टाम्प शुल्क में छूट प्रदान की जाए। जिससे यह क्षेत्र संभल सके। मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा स्टाम्प शुल्क है। जिसके कारण आमजन को अपना घर खरीदने में बहुत तकलीफ होती है। महाराष्ट्र में 3 फीसदी स्टाम्प शुल्क है। सरकार को तत्काल इसे कम करना चाहिए। ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके और मध्य प्रदेश शासन को भी राजस्व की प्राप्ति हो सके।

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