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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बीटी बैगन।

सरकार के फैसले के खिलाफ है भारतीय किसान संघ।


जबलपुर। बीटी बैंगन एक हाइब्रिड सब्जी है गुणवत्ता के लिहाज से कमजोर साबित हुई। बीटी बैगन के परीक्षण की अनुमति सरकार द्वारा दी गई है। इसके विरोध में भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत की जिला इकाई जबलपुर ने आवाज बुलंद की है। भारत सरकार की जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति द्वारा मध्य प्रदेश में बीटी बैंगन की जेनेटिकली मॉडिफाइड जीएम फसल के दूसरे परीक्षण को अनुमति मिली है। सरकार का यह एकतरफा निर्णय है जिसका भारतीय किसान संघ मध्य प्रदेश विरोध कर रहा है। बीटी बैंगन हमारे देश में जीएम फसलों के परीक्षण से संबंधित घटनाओं से परिचित हैं। पर्यावरण प्रदूषण, मानव स्वास्थ्य, उत्पादकता और बाजार पर एकाधिकार जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं जिन्हें लेकर जीएम फसलों का विरोध होता है। इस विषय में पहले भी विरोध की आवाज उठी है और इससे जुड़े मुद्दे अभी भी लंबित हैं कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकांश प्रतिष्ठित संस्थानों में संसदीय स्थाई समिति, माननीय सर्वोच्च न्यायालय की तकनीकी विशेषज्ञ समिति, वैज्ञानिकों के विचार, कुछ कृषि प्रधान राज्यों से संबद्ध अधिकारी इत्यादि ने आशंका व्यक्त की है। यहां तक कि राज्यों ने पहले जीएम खाद्य फसलों/परीक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया है। बीटी कपास की प्रौद्योगिकी विफल रही है। जड़ी बूटी सहिष्णु कपास की अवैध कटाई के कारण एचजीईसी पापों की मुख्य पार्टी है। भारतीय किसान संघ द्वारा इस विषय में एक जिम्मेदार भूमिका निभाई जा रही है। 600 से अधिक जिलों में सभी केंद्र शासित प्रदेशों में इस प्रौद्योगिकी खतरे के विषय में जागरूकता पैदा की जा रही है। इस विषय में भारतीय किसान संघ के तरफ से डिप्टी कलेक्टर दीपाश्री गुप्ता को ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर ओम नारायण पचौरी, मोहन तिवारी जिला अध्यक्ष, गजेंद्र सिंह, वीरेंद्र, रामकृष्ण सोनी, प्रेमचंद्र, पुखराज चंदेल, मुकुल पचौरी, गणेश तिवारी, राजेश सिंह ठाकुर रामदास मौजूद रहे। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क सैनिटाइजेशन का प्रयोग करते हुए सभी ने अपनी बात प्रशासन के सामने रखी। भारतीय किसान संघ की ओर से बोलते हुए जिला अध्यक्ष मोहन तिवारी ने बताया कि बीटी बैंगन की प्रजाति स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है सरकार ने जो उसके परीक्षण का निर्णय लिया है इसका विरोध भारतीय किसान संघ द्वारा किया जाता है।

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