लोन दिलाने के एवज में पचास हजार ऐंठ लिए।

आरोपी फरमान अली के विरुद्ध शिकायत दर्ज।
जबलपुर। लोगों में एक आम धारणा बन गई है कि, यदि किसी बैंक से लोन लेना है तो बैंक मैनेजर या बैंक कर्मियों को रिश्वत देनी ही पड़ेगी।
इस धारणा के बनने में बैंकों का कितना हाथ है। यह तो जांच का विषय है। लेकिन अक्सर लोगों को लोन दिलाने का लालच देने वाले ठग बैंक कर्मियों, और बैंक मैनेजरों के नाम को ढाल बनाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं।
ऐसा ही एक मामला देखने में आया है, अधारताल के रहने वाले मोहम्मद सरफराज के साथ।
उनकी जान पहचान में फरमान अली नाम का एक व्यक्ति आया जिसने उन्हें बैंक से लोन दिलाने का झांसा दिया और उनसे थोड़े-थोड़े करके पूरे ₹50000 ऐंठ लिए।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक आरोपी के काम करने का तरीका
कुछ ऐसा है कि, बैंक का लोन दिलाने के एवज में उसके द्वारा ली जाने वाली रकम को, लोन लेने वाला किसी भी सूरत में देने से इनकार नहीं कर सकता।
खर्चे के नाम पर पहले ही वह कुछ वसूली कर लेता है। फिर अपनी सेटिंग वाले बैंक में जाकर उस व्यक्ति का खाता खुलवाता है। एक नया सिम कार्ड उसने उस व्यक्ति के नाम से खरीदता है और उसी सिम का नंबर उस बैंक खाते में ऐड करवाता है। उसके बाद बैंक की तरफ से मिलने वाली पासबुक, चेक बुक, एटीएम कार्ड, पासवर्ड सब अपने कब्जे में रखता है।
सरफराज का भी उसने एक नाम ही बैंक में खाता खुलवाया। और उससे भी खाते से जुड़े दस्तावेज पासबुक चेक बुक इत्यादि मांगे और कहा कि 15 दिन बाद तुम्हारा लोन हो जाएगा।
जब सरफराज ने इन्हें देने से मना किया तो उस व्यक्ति ने खुलकर कह दिया कि अब तुम लोन भूल जाओ और अपने 50,000 भी भूल जाओ। उसकी इस बात से सरफराज आहत हुआ और उसके बाद उसने आरोपी फरमान अली के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
व्यवस्था की नाक के नीचे होते इस गड़बड़ झाले को समझने के लिए निश्चित रूप से एक गहन और पुख्ता जांच की आवश्यकता है। क्योंकि इस तरह के ठग बहुत लोगों को अपना शिकार बनाते हैं और उनकी गाड़ी कमाई लूट लेते हैं।
इसकी शिकायत मोहम्मद सरफराज द्वारा हनुमान ताल थाने में दी गई गौर करने लायक बात यह है कि इसके पहले मोहम्मद सरफराज ने यह शिकायत एसपी ऑफिस में दी थी।
यदि इस व्यक्ति की समय पर सही जांच हो जाए तो बहुत संभव है कि आने वाले समय में बहुत से लोग इसके द्वारा की जाने वाली ठगी से बच जाएंगे और पीड़ित व्यक्ति को उसका पैसा भी वापस मिल जाएगा।



