फर्ज डॉक्टरों पर मेहरबान क्षेत्रीय स्वास्थ्य अधिकारी
दैनिक जबलपुर दर्पण। जिनको झोलाछाप डॉक्टर कहां जाता है वह डॉक्टरों में क्वालिटी अलग अलग होती है कुछ डॉक्टर झूला में इंजेक्शन दवाइयां भर कर के घर घर जाकर के ट्रीटमेंट करते हैं और कुछ आयुर्वेदिक के नाम पर स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं जोकि वह फर्जी तरीके से आयुर्वेदिक का रजिस्ट्रेशन करा करके और इंजेक्शन लगाने में बहुत ही तेज पड़ते हैं इंजेक्शन दवाइयां सभी को बहुत ही महंगे रेट पर देते हैं जबकि हर व्यक्ति को इंजेक्शन लगाने का नहीं है बॉटल लगाने का हर रोग में नहीं लगाना चाहिए लेकिन जबकि एमबीबीएस डॉक्टर किसी भी मरीज को जब तक पूर्ण तरीके से चेक नहीं करता जब तक उसको टेबलेट नहीं लिखता लेकिन इन फर्जी क्लीनिक चलाने वालों को अब तक जिले के स्वास्थ्य अधिकारी और साथ के क्षेत्रीय स्वास्थ्य अधिकारी इन पर क्यों मेहरबान हैं जबकि आए दिन इन फर्जी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों की लापरवाही से किसी ना किसी को किसी भी समय प्रॉब्लम होती रहती है और यह लोग अपना बिजनेस जोर शोर से चला रहे हैं क्षेत्र में क्या स्वास्थ्य अधिकारी कभी फील्ड में जाकर के यह रिपोर्टिंग नहीं करता है कि फर्जी क्लीनिक जिले में कितने हैं जबकि जबलपुर दर्पण ने इस चीज का सर्वे किया था जिसमें कम से कम 8 सो 76 फर्जी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर छिंदवाड़ा जिले में मौजूद हैं हाल ही में चंदन गांव में कैलाश लोखंडे के द्वारा ट्रीटमेंट किया गया था जो बच्चा चंदन गांव क्षेत्र का ही रहवासी है लेकिन अब तक जिला स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार का प्रयास नहीं किया गया क्योंकि कार्रवाई करने जो भी जाता है उसका मुंह बंद कर दिया जाता है खर्चा पानी दे कर के ऐसा सूत्रों ने जबलपुर दर्पण को बताया क्योंकि इनके हौसले जो बुलंद हैं उसका जवाबदार जिले का मैन स्वास्थ्य अधिकारी है और अब देखना यह है कि क्या यह बात जिले के अध्यक्ष महोदय जी को कितना हमारी इस खबर से प्रभावित करती है क्या छिंदवाड़ा जिले में यह फर्जी क्लीनिक चलाने वालों पर कार्यवाही कब की जाएगी या फिर यह लोग इसी प्रकार से अपना क्लीनिक चलाते रहते हैं जबकि कुछ पत्रकार भाई डॉक्टरों से इंटरव्यू लेने पहुंचते हैं तो डॉक्टर साहब आयुर्वेदिक का सर्टिफिकेट जो जिला स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा बना करके दिया जाता है जिसको यह अपना रजिस्ट्रेशन बता करके मीडिया वालों से ऐड कर बात करते हैं इन महाशय को शायद यह पता नहीं होगा की मीडिया देश का चौथा स्तंभ है और चौथा स्तंभ क्यों कहा जाता है आज मैं इस बात का खुलासा कर रहा हूं क्योंकि अभी भारत देश में लोगों को मीडिया के बारे में संभवत बहुत कम जानकारी होगी मीडिया जो है राष्ट्रपति की चौथी शाखा है नंबर 1 कार्यपालिका नंबर दो सुरक्षा पालिका नंबर 3 न्यायपालिका और नंबर 4 मीडिया यह राष्ट्रपति की चौथी शाखा है जिसको लोग इतना हल्के में लेकर के बात करते हैं उन लोगों को मैं बताना चाहता हूं कि कृपया हर पत्रकार से उलझने की कोशिश ना करें क्योंकि पत्रकार बगैर तनखा के देश की जनता के लिए और जनहित के लिए अपना समय अपना परिवार और अपना जीवन और मृत्यु के बीच लड़ने को तैयार रहता है जब एक पत्रकार अपनी कलम से देश को एवं अपने क्षेत्र के लोगों को जागरूक करना चाहता है तब लोग जागरूक क्यों नहीं हो रहे हैं दूसरी बात मीडिया को किसी भी प्रकार की सैलरी नहीं मिलती है जबकि सरकार को भी इस बात पर मंथन करना चाहिए कि देश को मीडिया हमेशा एक अच्छा नेता खोज करके ला कर देता है और प्रदेश को और अपने क्षेत्र में अपने जिलों में हर प्रकार से जनहित के लिए विकास के लिए हर बार लिखता है फिर राष्ट्रपति की चौथी शाखा की इतनी बेजती छोटे से स्तर के लोग क्यों कर रहे हैं क्या जिले के अधिकारी जो अपनी कुर्सियों पर बैठे हुए हैं वह अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं या फिर मुझे लगता है कि कहीं ना कहीं यह भी इनके गुलाम समझ में आते हैं अब देखना यह है कि क्या छिंदवाड़ा जिले में इन झोलाछाप डॉक्टरों को अंदर किया जाएगा या फिर यह खुलेआम अपना व्यापार जारी रखेंगे दैनिक जबलपुर दर्पण से जिला ब्यूरो चीफ एसपी यादव यह खबर खासतौर पर सूत्रों के द्वारा दी गई जानकारी पर लिखी गई है जिस पर कुछ चीजें मैंने मीडिया के बारे में उन लोगों को बताने के लिए लिखा हूं कि जो लोग चौथे स्तंभ को हल्के में लेते हैं।
एसपी यादव एडिटर चीफ छिंदवाड़ा



