साहित्य दर्पण

गत 12 वर्षों से हिंदी को सशक्त बनाने में समर्पित संस्था:हिंदी की गूँज

हिन्दी की गूंज संस्था का बारहवाँ स्थापना दिवस वर्चुअल माध्यम से 15 मई 2023 ,को संपन्न हुआ । मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री शिव दयाल जी , पद्मश्री डॉक्टर श्याम सिंह शशि जी तथा डॉक्टर सुनील सग्गड जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चंद लगा दिये ।कार्यक्रम का शुभारंभ डॉक्टर चैत्रा के मुखारविंद से प्रस्फुटित माँ वीणा वाणी की वंदना से हुआ । कार्यक्रम के प्रेरणा स्तोत्र और हिन्दी की गूंज के संचालक श्री नीहार जी ने अपने उद्बोधन में हिन्दी के प्रति संघर्ष के महान सेनानी स्वर्गीय श्री राज करण सिंह जी का स्मरण करते हुए प्रारंभिक रूप रेखा से लेकर हिन्दी की गूंज के पूरे सफ़र की रोचक जानकारी प्रस्तुत की । पद्मश्री डॉक्टर श्याम सिंह शशि जी ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए व्यवहार भानू पत्रिका के बारे में जानकारी दी और कहा कि बाल साहित्य का विशाल भंडार है जिस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता क्योंकि जो भी लिखा गया है या लिखा जा रहा है उसे बच्चों तक पहुँचाना चाहिये । श्री लौह कुमार ने भारतीय भाषा के आंदोलन की जानकारी देते हुए कहा कि राज करण जी के विचार आज भी सक्रिय हैं और रचनात्मक कार्य कर रहे हैं । मुख्य अतिथि श्री शिव दयाल जी ने हिन्दी भाषा के बारे में रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के हिन्दी भाषा के प्रति रुझान की जानकारी देते हुआ कहा कि उनकी दृष्टि से डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी के बाद शायद ही कोई राज नेता हुआ है जिनका हिन्दी के प्रति लगाव रहा हो ।हल्द्वानी , महाराष्ट्र , तमिलनाडु , कर्नाटक ,उड़ीसा , राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और भोपाल के शाखा प्रभारियों ने अपने अपने क्षेत्रों में हिन्दी की गूंज संस्था के सानिध्य में वार्षिक कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत किया ।पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन श्री खेमन्द्र जी और तरुणा पुंडीर ‘ तरुनिल’ जी द्वारा किया गया । संचालक के रूप में दोनों की कुशल भूमिका ने ढाई घंटे चले कार्यक्रम में सभी को अंत तक बांधे रखा । श्री कांता प्रसाद जी के मधुर कंठ से निकला गीत हिन्दी की गूंज समंदर पार गई संस्था का पूरा इतिहास अपने में समेटे था जिसने सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया । कार्यक्रम का समापन अधक्षीय उद्बोधन और श्री नीहार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ । ढाई घंटे तक चला कार्यक्रम अपने उद्देश्य की प्राप्ति में पूर्ण रूप से सफल रहा ।

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