दमोह दर्पणमध्य प्रदेश

कीचड़ से सराबोर और तंग रास्ते में गुजर रही जिंदगी

सरकारी कलम इस दलदल भरे आलम को देखकर स्याह भी नही छिटक रही

ग्रामवासी कई बार लगा चुके हैं कलेक्टर एवं विधायको से गुहार……

मड़ियादो । गांव के लोग इंसान की दलील दे रहे हैं, बरसों बीत गए आजादी के बाद आज तक उस रास्ते पर सरकारी कलम इस दलदल भरे गलियारों में अपनी न्याय की स्याही भी नहीं छिटक रही। वोट के नाम पर किए गए हजारों वादे आज इस कीचड़ भरे नालों में मिट्टी मिट्टी हो गए। हजारों गुहार लगाएंगे हजारों कागज फोटोकॉपी दुकान पर रद्दी बन गए लेकिन ना तो उस सड़क के इंतजाम में किसी के हस्ताक्षर सामने आए ना तो किसी नेता ने उन ग्राम वासियों पर तरस खाया।
हम बात कर रहे हैं दमोह जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर हटा जनपद के ग्राम पंचायत देवरगढ़ी अंतर्गत आने वाले ग्राम भटदेवा की। जहां सैकड़ों परिवार बारिस के दिनों में अपने घरों में कैद हो जाते हैं। यहां खमरिया से भटदेवा करीब 3 किमी कच्चा और कीचड़ से भरा दलदली रास्ता होने के कारण भटदेवा के लोग निकलने को मजबूर हो जाते हैं। जानकारी अनुसार यहां लोग करीब 2 से 3 किलोमीटर तक कीचड़ से भरे दलदल में निकलने को को मजबूर हो चुके हैं। भटदेवा ग्राम के ग्रामवासियों दशरथ बिदुआ, रामकुमार पटेल, श्रीकांत कुर्मी, रामअवतार पटेल, राम पटेल, रामजी पटेल, बिनय पटेल, अमित बिदुआ, टोटल पटेल, भगवानदास बिदुआ, परसराम पटेल, हेतराम बिदुआ, सुरेंद्र पटेल, हरेंद्र बिदुआ, मदन मुकेश पटेल बिदुआ गोलू बिदुआ राजू पटेल उत्तम पटेल रमेश बिदुआ उप सरपंच रेवाराम पटेल, रेहा आदिवासी धरम बरमन आदि लोगों ने बताया कि रास्ता नहीं होने के कारण कई बार बीमार और असहाय मरीज गांव में ही दम तोड़ देते। इसी को लेकर आजादी के बाद से आज गांव के लोग अत्याधिक परेशान होकर अनेकोवार शासन-प्रशासन से गुहार भी लगा चुके हैं। कलेक्टर से लेकर, जिला पंचायत सीईओ तक और अनेकोवार राजनैतिक लोगो से भी गुहार लगा चुके है। जहाँ सिर्फ एक ही आस्वाशन सुनने को मिलता था कि जल्द ही बजट आएगा और सड़क का निर्माण भी किया जाएगा लेकिन उन्होंने इस पर सिर्फ दिलाशा ही दी गयी थी और आजतक वहा की सड़क नहीं बनी। अब लोगों ने जनप्रतिनिधियों पर अपेक्षा के आरोप लगाते हुए कहा अगर कोई ध्यान नहीं दिया जाता तो आगामी समय मे चक्का जाम कर धरने पर बैठने पर मजबूर होंगे। बस सड़क बनने की बात तो बस अब इस पाले से उस पाले के बीच मे लुड़क रही है। जिसे न तो कोई सार्थक चिंतन वाली दिशा मिल रही है, न तो ग्रामीणों को न्यायसंगत ढांढस ही मिल पा रहा। भटदेवा ग्राम के ग्रामीण अब वहां इकट्ठे हो गए हैं और एक ही मकसद है कि “अब सड़क बननी है मतलब बननी है”। अब इस संघर्ष में चाहे कोई अनसन करना पड़े या कोई आंदोलन करना पड़े। यह अवाज ग्रामवासियों, मजदूरो और ग्राम के किसानो की आवाज है। जिसे कोई दबा नही सकता।

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