जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

संयुक्त-सामुदायिक वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से होगा वृक्षारोपण

जबलपुर दर्पण नगर संवाददाता। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद ने संयुक्त-सामुदायिक वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से सी.एस.आर/सी.ई.आर.एवं अशासकीय निधियों के उपयोग से वृक्षारोपण नीति अनुमोदित की है। नीति अनुसार वन क्षेत्र की पुनर्स्थापना में भूमिका अदा करने का इच्छुक औद्योगिक समूह, निगमित निकाय, व्यक्ति या स्वयं-सेवी संस्था, वनमंडल या राज्य स्तर पर स्थापित वन विकास अभिकरण को अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। निकाय संस्थाएँ अपनी प्राथमिकता अनुसार वृक्षारोपण के लिये क्षेत्र का चयन कर सकेंगे। वृक्षारोपण के लिये न्यूनतम 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल का चयन किया जाएगा। स्थानीय प्रजातियों को वृक्षारोपण में प्राथमिकता दी जायेगी। वृक्षारोपण के लिये निधियाँ उपलब्ध कराने वाली संस्था,वन समिति और वन विकास अभिकरण के बीच एक त्रि-पक्षीय अनुबंध किया जाएगा। वृक्षारोपण के लिए निधि उपलब्ध कराने वाली संस्था को वन क्षेत्र या वनोपज पर किसी भी प्रकार का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होगा। निधियों को प्राप्त कराने के एवज में संस्था को कार्बन क्रेडिट उपयोग करने का अधिकार होगा।निधियाँ उपलब्ध कराने वाली संस्था द्वारा अनुबंध लागू होने के एक वर्ष की अवधि के अंदर वनमंडल स्तर पर वन विकास अभिकरण के खाते में इलेक्ट्रॉनिक रीति से जमा कराई जायेगी। वन विकास अभिकरण द्वारा कार्य सम्पादन के लिये राशि वन समिति के विकास खाते में जमा कराई जायेगी। संस्था यदि चाहे तो वन विकास अभिकरण को सूचना देते हुए सीधे राशि वन समिति के खाते में अंतरित कर सकेगा। वन क्षेत्रों में ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाएगा, जिससे स्थानीय समुदाय के अधिकारों एवं वन आधारित आजीविकाओं पर किसी भी प्रकार का विपरीत प्रभाव पड़े। वृक्षारोपण के लिये वन समिति के सहयोग से सूक्ष्म प्रबंध योजना तैयार की जायेगी। इसे वन समिति की आम सभा से अनुमोदन के बाद वनमंडल अधिकारी द्वारा स्वीकृति दी जायेगी। कार्य संपादन वन समिति द्वारा किया जायेगा। वृक्षारोपण के अनुश्रवण एवं मूल्यांकन की व्यवस्था विभागीय प्रक्रिया अनुसार की गई है। वृक्षारोपण को विभागीय मूल्यांकन प्रणाली में पंजीकृत कर समय-समय पर अद्यतन किया जायेगा। यह सुनिश्चित किया जायेगा कि तीन वर्ष की अवधि के बाद वृक्षारोपण में पौधों की जीवितता 50 प्रतिशत से अधिक होने पर ही रोपण को सफल माना जायेगा। जीवितता 50 प्रतिशत से कम होने पर अनुबंध निरस्त कर दिया जायेगा। एक वर्ष की अवधि के अंदर अनुबंध के अनुसार कार्य प्रारंभ नहीं करने, 2 वर्ष की अवधि में वृक्षारोपण का कार्य सम्पादित नहीं करने या अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करने पर वनमंडल स्तरीय वन विकास अभिकरण के सचिव को अनुबंध को निरस्त करने का अधिकार होगा। त्रिपक्षीय अनुबंध निरस्त करने का आदेश सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद ही जारी किया जाएगा। अनुबंध निरस्तीकरण के विरुद्ध अपील की जा सकेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page