ग्वालियर : चंबल संभाग तय करेगा सरकार का भविष्य


पूरे मध्यप्रदेश की लगी टकटकी,नेताओं की धड़कन तेज
रीवा। मध्य प्रदेश इस समय बिहार के बाद दूसरा ऐसा राज्य है जहां की राजनैतिक सरगर्मियों और तनाव को पूरे मध्यप्रदेश में महसूस किया जा रहा है। खरीद फरोख्त के अचूक अस्त्र के सहारे भाजपा ने मध्य प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर किया और कांग्रेस से सत्ता का सिंहासन छीनकर चौथी बार मध्यप्रदेश में अपनी सरकार बना डाली।
अप्रत्याशित तरीके से कमलनाथ सरकार की विदाई में सबसे अहम किरदार निभाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने पीछे के दरवाजे से राज्यसभा सांसद बना दिया।
इतना ही नहीं मध्य प्रदेश में उपचुनाव होने के बाद केंद्र की मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाए जाने का लालीपाप भी महाराज को दिया गया है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मध्य प्रदेश के 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को जीतना है। इस उपचुनाव में सबसे अहम रोल ग्वालियर और चंबल संभाग की 15-16 विधानसभा सीटों का रहेगा।
यह इलाका सिंधिया घराने का गढ़ माना जाता है। यही वजह है कि राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया यह लगातार कहते हुए नजर आते हैं कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में ग्वालियर और चंबल संभाग की जनता ने कांग्रेस को नहीं बल्कि सिंधिया परिवार को वोट दिया था।
राज्यसभा सांसद के इस दावे की अग्नि परीक्षा भी उपचुनाव में होने वाली है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनैतिक दलों के लिए 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव करो या मरो वाला है।
हर सीट तक खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं पहुंच रहे हैं। सौगातों की छड़ी लगाई जा रही है। विधानसभा चुनाव 2018 में ग्वालियर और चंबल संभाग ने ही भाजपा को सरकार से बाहर करते हुए कांग्रेस को सत्ता के सिंहासन पर बैठाने में मुख्य किरदार निभाया था।
भाजपा को पूरा भरोसा है कि राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के कारण ग्वालियर और चंबल संभाग की जनता इस उपचुनाव में केवल भाजपा का साथ देगी। उपचुनाव का परिणाम भविष्य की तस्वीर बयां करने में कारगर साबित होगा।
दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी टीम लेकर उपचुनाव वाली सीटों पर पहुंच रहे हैं।
जनता को यह बताया जा रहा है कि आखिर किस तरह निजी स्वार्थ के खातिर जनादेश वाली कांग्रेस सरकार को योजनाबद्ध तरीके से हटाया गया है।
क्या भाजपा के लिए किंगमेकर बनेंगे सांसद सिंधिया?
विधानसभा चुनाव 2018 में मध्यप्रदेश की जनता ने अपना फैसला सुनाते हुए भाजपा सरकार को सत्ता के सिंहासन से हटा दिया था। लेकिन कुछ समय बाद ही साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने से जुड़े व्यक्ति से हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद से लगातार महाराज तनाव में आ गये। मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने पर भी उन्हें न तो मुख्यमंत्री बनाया गया और न ही कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष। इसी बीच महाराज के ससुराल वालों ने भाजपाई कुनबे से जोड़ने के लिए पूरी रुपरेखा तैयार कर दी। भाजपा को पुनः सत्ता में लाने के लिए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया क्या किंगमेकर की भूमिका निभा पाएंगे?
भाजपा- सिंधिया की दोस्ती होने के तुरंत बाद कांग्रेस सरकार में शामिल 22 सिंधिया सर्मथक विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा की सत्ता के सिंहासन पर वापसी करवा दी। भाजपा के लिए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया कितने फायदेमंद है यह तो उपचुनाव के परिणाम के तौर पर ही सामने आएगा। भाजपा को यह विश्वास है कि सिंधिया परिवार की लोकप्रियता उसे उपचुनाव में बड़ी जीत जरुर दिलाएगी।
अब देखना यह है कि खरीद फरोख्त के बैसाखी पर मंत्री बनने वाले कितने बागी विधायकों पर जनता मेहरबान होगी। चुनावी गर्माहट लगातार बढ़ रही है।
उपचुनाव परिणाम पर सबकी लगी हैं निगाहें
नवंबर 2020 में मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान कराया जाएगा। राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा सरकार अति आत्मविश्वास से लवरेज चल रही है। भाजपा सरकार को अपने ईवीएम मैनेजमेंट पर पूरा भरोसा है। उन्हें यह लगता है कि ग्वालियर और चंबल संभाग के मतदाताओं की राजघराने के प्रति गहरी आस्था भाजपा को बड़ी जीत जरुर दिलवाएगी।
उधर भाजपा सरकार और संगठन को भी यही मुगालता है कि सिंधिया के भाजपा में आने से उपचुनाव केवल हमारे लिए भाग्यशाली साबित होगा।
निस्संदेह 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में मतदाता जो परिणाम देंगे उसी से मध्यप्रदेश का भावी राजनैतिक भविष्य तय होगा।
दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को यह विश्वास है कि पंद्रह माह में कांग्रेस सरकार ने क्या किया यह जनता बखूबी जानती है। खरीद फरोख्त करके सत्ता परिवर्तन करने वालों को उनकी शैली में जनता माकूल जवाब देगी।
यह 28 विधानसभा सीटों का उपचुनाव लोकतंत्र और नोटतंत्र के बीच आधारित हो गया है। परिणाम बताएंगे कि हमारे देश का लोकतंत्र जीतेगा या फिर नोटतंत्र की जय जयकार होगी?
अब मतदाता तय करेगा, कौन है मुकद्दर का सिकंदर
देश के हदय स्थल मध्यप्रदेश की सियासत किस करवट बैठेगी , यह तो उपचुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही पता चलेगा। भाजपा सरकार और संगठन ने विधानसभा की 28 सीटों को जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है।
चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणाओं का अंबार लगा दिया है। उधर इस चुनावी महाभारत में कांग्रेस भी पूरा जोर लगाए हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री जीतू पटवारी सहित अन्य नेताओं की मुस्तैदी 28 सीटों पर बनी हुई है। चुनाव प्रचार में कांग्रेस कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।
अब सारा दारोमदार विधानसभा की 28 सीटों पर कायम मतदाताओं के कंधों पर टिका हुआ है।
अब हमारे मतदाता ही यह तय करेंगे कि इस चुनावी महाभारत में आखिर कौन मुकद्दर का सिकंदर साबित होगा?
बहरहाल भाजपा उपचुनाव में अपनी बड़ी जीत तय मान रही है। जिसकी सबसे बड़ी वजह भाजपा का ईवीएम चुनावी मैनेजमेंट ही है।



