भगवान श्रीकृष्ण सम्पूर्ण जगत के रक्षक

जबलपुर दर्पण। स्वामी नरसिंह दास जी महाराज हरि अजन्मा होकर भी जन्म धारण किया, लीलाएँ की, अनेक विवाह कर निर्लिप्त होकर लौकिक व्यबहार इसलिए किया कि जगत में मेरे भक्त मेरी इन लीलाओंका गायन व श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। अद्भुत सुदामा चरित्र की मीमांसा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि भक्तों ने तो भगवान के चरण धोये पूजन किये पर भगवान ने भक्त का पूजन किया चरण धोया वह केवल सुदामा जी है, प्रभु ने विप्र सुदामा को सखा कह कर आदर किया चरण धो. कर सम्मान किया क्योंकि यह विद्र प्रशान्त, जितेन्द्रिय व विरक्त है। श्री परीक्षित मोक्ष के साथ कथाका विराम करते हुए भागवत का अंतिम संदेश बताया कि इसकलियुग मे – केवल हरिकीर्तन माल से जीवका कल्याण हो जाता है। ” नाम संकीर्तनं यस्य, सर्व पापप्रणाशनम् । प्रणामो दुःख शमनस्तं नमामिहीरं परम् ॥” उक्त उद्गार नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने फुलर भीटा में श्रीमद्भागवत कथा पुराण के सप्तम दिवस श्री व्यास पीठ से कहें । दिवस श्री कृष्ण सुदामा चरित्र , भागवत माहात्म्य में ठा.. सुखराम सिंह ठा.. मुलायम सिंह ठा.घनश्यामसिंह ठा. सत्यनारायण सिंह ठा. नारायण सिंह ठा. कमल सिंह ठा. धूपसिंह ठा. ओंकार सिंह, ठा भगवान सिंह ठा. तुलसी सिंह, ठा० कुशल सिंह ठा. सोने सिंह ठा. गिरिश नारायण सिंह ठा. लवकुश सिंह ठा. ब्रजेश सिंह, अशोक मनोध्या जी राजेन्द्र पयाशी ठा. भागवेन्द्र सिंहा, गुरुवेन्द्र सिंह . गगन सिंह ढा. सौरभ सिंह. राजा भैया हो- हर्षित सिंह ढा. अंश सिंह . दिव्यम सिंह सहित ग्राम- फुलर भीटा , शहपुरा (भिटोनी) के श्रृध्दालु भक्त जनों की बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित किया ।



