नई दिल्ली

लिवर ट्रांसप्लांट के मामले में दिल्ली का एम्स बेस्ट

नई दिल्ली। दिल्ली का एम्स अब लिवर ट्रांसप्लांट की दिशा में तेजी से काम करने की तैयारी कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में ही एम्स में 4 लिवर ट्रांसप्लांट हुए हैं। सबसे खास बात ये है कि एम्स में लिवर ट्रांसप्लांट का खर्चा आधे से भी कम होगा।

देश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करने वाला एम्स, लिवर ट्रांसप्लांट के मामले में पिछड़ा हुआ है। अब एम्स नई ऊर्जा के साथ इस दिशा में आगे बढ़ने जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में 4 लिवर ट्रांसप्लांट हुए हैं, जिसमें एक लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट भी है। खास बात यह है कि 30 से 40 लाख के बीच प्राइवेट में होने वाला ट्रांसप्लांट एम्स में सीजीएचएस रेट मात्र 11 से 14 लाख में ही हो जाएगा।

लिवर ट्रांसप्लांट की दिशा में तेजी से किया काम-एम्स का कहना है कि जब कैडेवर डोनेशन के लिए एक्ट बना था, तभी से एम्स का गैस्ट्रो सर्जरी विभाग एक्टिव था। 1996 में पहली बार अटेंप्ट लिया गया था, तब सारा फोकस कैडवर डोनेशन पर था। विभाग का फोकस कभी लिविंग डोनेशन के जरिए ट्रांसप्लांट की दिशा में गया नहीं। जबकि नॉर्थ इंडिया में 90 परसेंट ट्रांसप्लांट लिविंग डोनर से ही होता है और मात्र 10 परसेंट कैडेवर डोनेशन से किया जाता है। वहीं, साउथ इंडिया में 70 परसेंट लिविंग और 30 परसेंट कैडेवर से होता है। इसलिए समय की जरूरत को समझते हुए अब एम्स प्रशासन ने लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की दिशा में काम को तेज किया है।

इस साल बनाई थी कमिटी-एम्स ने मार्च में 11 मेंबर की कमेटी बनाई थी, जिसका चेयरमैन गुजरात यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रांसप्लांटेशन साइंस के वाइस चांसलर डॉ. प्रांजल को बनाया हैं। डॉ. प्रांजल न केवल लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट को बेहतर करने की दिशा में अपनी राय दे रहे हैं, बल्कि ट्रांसप्लांट सर्जरी को लीड भी कर रहे हैं। साथ ही एम्स के सर्जन को ट्रांसप्लांट की बारिकियां भी सीखा रहे हैं। एम्स का भी मानना है कि सरकारी अस्पताल के एक्सपर्ट के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जितनी सर्जरी होंगी, हमारा अनुभव उतना बढ़ेगा और कुछ महीनों में एम्स के सर्जन भी इसे अपने स्किल की मदद से सर्जरी कर पाएंगे।

तेजी से हो रहा इस दिशा में काम-एम्स के गैस्ट्रो सर्जरी के सर्जन डॉ. सुजय पॉल ने बताया कि कैडेवर डोनर से मिले लिवर के लिए ट्रांसप्लांट का एसओपी हमारे पास है। अभी लिविंग डोनर को लेकर नई एसओपी बनाई जा रही है। अब तक एम्स में कुल 59 लिवर ट्रांसप्लांट हो चुके हैं, 4 लिविंग है, पहला लिविंग 2015 में किया गया था। हाल ही में एक और लिविंग ट्रांसप्लांट किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी 7 फैकल्टी हैं, सभी इसका हिस्सा हैं। हमारा मकसद लिविंग लिवर ट्रांसप्लांट की दिशा में भी मरीजों को बेस्ट सुविधा और केयर प्रदान करना है और इस दिशा में हम तेजी से काम कर रहे हैं।

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