डायलिसिस के अभाव में किडनी डिसीस महिला की मौत

इमेरजेंसी सेवाओं के लिए कोई भी दूसरा टेकनीशियन यूनिट में नही
किडनी डिसीस से पीड़ित मम्मी की मौत टेकनीशियन की लापरवाही से हुई है।सोमवार की सुबह तबियत बिगड़ने के बाद हमने क़ई बार उन्हें फ़ोन किया पर वो समय पर नही आ सके,जिसके बाद मम्मी की मृत्यु जिला अस्पताल में हो गयी है,उक्त बातें मुख्यालय स्थित मृत महिला के व्यथित पुत्र मो सुहैल अली निवासी संजय मार्केट ने कही है।विदित हो कि मृत महिला परवीन बानो पति मो अली (लखन) उम्र 50 वर्ष का सप्ताह में दो दिवस सोमवार और गुरुवार डायलीसिस होती थी,सोमवार को उनके डायलिसिस का टर्न था,तबियत बिगड़ने पर सोमवार की सुबह परिजनों ने आननफानन में उन्हें जिला अस्पताल डायलिसिस कराने लाया था,परन्तु बार बार फ़ोन करने पर भी समय पर टेकनीशियन नही पहुंच पाया जिस वजह से उनकी मौत हो गयी है।एक टेकनीशियन के भरोसे चल रहे डायलिसिस यूनिट में इसके पूर्व भी क़ई शिकायतें देखी गयी है,बाद में परेशान मरीज दूसरे जिले जाकर अनर्गल परेशान होकर डायलिसिस कराए है।
6 साल पहले यूनिट का हुवा था शुभारम्भ
जिला अस्पताल स्थित डायलिसिस यूनिट में जिले के तकरीबन दो दर्जन पेशेंट फिलहाल डायलिसिस करा रहे है,परन्तु मरीज परिजनों की माने तो आये दिन कुछ न कुछ गड़बड़ियों की वजह से शहडोल या कटनी जाना पड़ता है,जिस वजह से अनर्गल अपव्यय के साथ समय खराब होता है।गौरतलब है कि प्रदेश सरकार वर्ष 2014 में निविदा के माध्यम से जिले में डीसीडीसी किडनी केअर को डायलिसिस यूनिट का शुभारंभ करने स्वीकृति दी थी,जिले में डायलिसिस यूनिट शुभारम्भ से किडनी डिसीस से ग्रस्त जिले के मरीजों को लाभ भी मिलता रहा परन्तु धीरे धीरे कम्पनी लापरवाही करने लगी,जिससे मरीजों को अनर्गल दूसरे जिले जाकर डायलिसिस कराने मजबूर होना पड़ा।
न आईसीयू,न वेंटिलेटर और न नेफ्रोलॉजिस्ट
जिला अस्पताल में कुल 13 शासकीय चिकित्सको में किडनी मरीज़ों के लिए कोई भी नेफ्रोलॉजिस्ट चिकित्सक नही है जिस वजह से भी काफी समस्याएं बनी हुई है।इमेरजेंसी सेवाओं में किडनी से ग्रस्त गम्भीर मरीजों के इलाज की भी समुचित व्यवस्था नही है,ऐसे मरीजों के लिए अस्पताल में आईसीयू एवम वेंटिलेटर का होना नितांत आवश्यक है,परन्तु जिले में ऐसी कोई भी व्यवस्था नही है,जिस वजह से क़ई मरीज पिछले क़ई सालों में मृत परवीन बानो की तरह काल के गाल में समा चुके है।



