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किसानों को उन्नत तकनीकों अपनाने की सलाह:डॉ इंदिरा त्रिपाठी,कृषि अनुविभागीय अधिकारी

खरीफ सत्र में सामयिक सलाह

जबलपुर दर्पण पाटन ब्यूरो। खरीफ सत्र मैं पाटन तहसील क्षेत्र में फसलों की बोनी बड़े जोर-शोर से जारी है। वर्तमान स्थिति में वर्षा व मौसम भी बोनी के अनुकूल होता जा रहा है जिससे किसान अपने कृषि कार्य में तन्मयता से लगे हुए हैं।किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उपसंचालक डॉ एसके निगम व अनुविभागीय अधिकारी कृषि पाटन डॉक्टर इंदिरा त्रिपाठी ने जिले के किसानों को उन्नत तकनीकों अपनाने की सलाह दी है।

आज दिनांक तक जिले के जबलपुर पनागर कुंडम व रांझी क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा रिकॉर्ड की गई है जबकि शहपुरा पाटन मझौली मैं बरसात अपेक्षाक्रत कम है। जिले में धान की खेती 50% रकबे में की जा चुकी है एवं शेष रकवे में धान की रोपाई का कार्य जारी है। किसान धान का अधिक उत्पादन लेने के लिए रोपा पद्धति से धान की फसल लेते हैं जिसके लिए अभी पर्याप्त समय है। इस बार किसानों ने सुगंधित धान की किस्में व हाइब्रिड धान की किस्मों की बोनी पर विशेष ध्यान दिया है जो कि अधिक उत्पादन व अधिकतम दाम देती हैं। इसी तरह से मक्का की बोनी भी 60 से 70% हो चुकी है। दलहन तिलहन के लिए अभी बोनी 30 से 40% तक हो चुकी है और आगे बोनी जारी रहेगी।

कृषकों को सलाह दी जा रही है कि वह उचित मात्रा में ही बीज का उपयोग करें साथ ही उर्वरकों का उपयोग कृषि वैज्ञानिक व विभागीय अधिकारियों की सलाह लेते हुए करें। कृषि विभाग ने मोटे अनाज की खेती के लिए भी कोदों का उन्नत बीज भी उपलब्ध कराया है। प्राकृतिक व जैविक खेती के लिए सलाह देते हुए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी रजनीश दुबे ने जानकारी साझा करते हुए किसानों से कृषि विश्वविद्यालय की जैविक यूनिट में संपर्क करने की सलाह दी है। कृषि विश्वविद्यालय के जैविक उर्वरक उत्पादन केंद्र में 16 प्रकार के जीवाणु खाद उपलब्ध है। ट्राइकोडरमा माईकोराजा व एलगी का उपयोग करने से धान की खेती में लाभ होता है साथ ही साथ जिंक फास्फोरस व नत्रजन के कल्चर भी उपलब्ध है।

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