कटनी कलेक्टर द्वारा जारी आदेश वापस कराये जाने हेतु करेंगे विरोध-पी.डी. खैरवार

अतिथि शिक्षक परिवार ने सभी वर्गों का किया है आवाहन
अनुभव प्रमाण पत्र मात्र की लालच बताकर शिक्षित बेरोजगारों को नि:शुल्क शैक्षणिक कार्य करने लिखित सहमति लेकर भर्ती करने का आदेश वर्तमान परिस्थितियों के विपरीत है
मण्डला। जिले के बुद्धिजीवी वर्ग का साथ लेकर शिक्षित बेरोजगार एवं अतिथि शिक्षक परिवार सोमवार 19 अक्टूबर 2020 को महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर सोशल मीडिया में छाये आदेश कटनी जिला कलेक्टर के आदेश क्रमांक 3807 को वापस कराए जाने के साथ ही संबंधित पर उचित कार्रवाई करने की मांग करते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन भेंट करेंगे।
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्य प्रदेश के संयोजक संस्थापक पी.डी.खैरवार ने जारी विज्ञप्ति में बताया है,कि 16 अक्टूबर 2020 को कटनी जिले के कलेक्टर द्वारा प्रभारी प्राचार्यों को संबोधित कर जारी आदेश क्रमांक 3807 मानव अधिकार के खिलाफ है। आदेश में लिखा गया है,कि जिले के शासकीय विद्यालयों में पढ़ाई कार्य करने के लिए शिक्षकों के विरुद्ध कम से कम स्नातक उत्तीर्ण शिक्षित बेरोजगार विद्यार्थियों की भर्ती की जाये। जिन्हें बदले में सिर्फ अनुभव प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।भर्ती से पहले नि:शुल्क काम करने मानदेय वेतन की मांग नहीं करने की लिखित सहमति लिये जाने की भी बात की गई है।जो शिक्षित युवा वर्ग का दमन ही नहीं मानव अधिकार के खिलाफ और वर्तमान लाकडाउन काल के विपरीत भी है।आपने कटनी कलेक्टर पर आरोप लगाते हुए कहा है,कि 7 महीनों से लाकडाउन की मार से प्रभावित बेरोजगारी का दंश झेल रहे बेरोजगार वर्ग को और भी अधिक बेरोजगारी की ओर धकेलने का काम करने की कोशिश कटनी जिले के कलेक्टर के द्वारा किया जाना अनुचित है। जबकि जिले में पढ़ाई कार्य के लिए आवश्यकता के अनुसार वर्षों से कम मानदेय पर काम करते आ रहे अतिथि शिक्षक अभी भी शैक्षणिक कार्य करने स्कूलों में आमंत्रण का इंतजार करते नियमितीकरण की मांग पर डटे हुए हैं। इन्हें सरकार झूला झुलाते राजनीतिक लाभ लेने उपयोग मात्र कर रही है।इनको लाकडाउन अवधि में भी बेरोजगार रखा गया है।जिनके संबंध में बिल्कुल भी बिना विचार किये फ्रेश बेरोजगारों को अनुभव प्रमाण पत्र की लालच बताकर नि:शुल्कं शैक्षणिक कार्य करने की लिखित सहमति लेकर कराना लोकतंत्र के खिलाफ है।इन बेरोजगारों का भी अधिकार है,कि जीवन यापन करने के लिए काम के बदले पारिश्रमिक अवश्य मिले।
खैरवार ने अपील की है कि सोमवार 19 अक्टूबर को दोपहर 12:00 बजे कलेक्ट्रेट के पास एकत्र होकर इस तरह के आदेश का घोर विरोध किया जाएगा साथ ही इस आदेश को वापस कराये जाने एवं दोषी पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। जिसमें समाज के बुद्धिजीवी वर्ग,पत्रकार बंधुओं एवं समस्त बेरोजगार साथियों सहित भारी संख्या बल के साथ अतिथि शिक्षकों को भी शामिल होने की अपील की गई है।



