कहीं भाजपा का जिले से सफाया तो नहीं, क्या कहते हैं राजनीतिक समीकरण

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। जिले में लगातार कांग्रेस का बढ़ता राजनीतिक दायरा से भाजपा कोई सबक नहीं ले रही है। अगर देखा जाए तो दोनों विधानसभा क्षेत्र डिंडोरी व शहपुरा से कांग्रेस दल के विधायक हैं, जिला पंचायत अध्यक्ष का पद भी कांग्रेस के पास ही है, ऐसे में अगर डिंडोरी नगर पंचायत के अध्यक्ष भी अगर कांग्रेस के खेमें में जाता है तो नगर पंचायत शहपुरा को छोड़ भाजपा का सफाया होता जिले में दिख रहा है। पिछले दिनों नगर परिषद चुनाव परिणाम होते ही राजनीति गहमागहमी जोरों पर चल रही है। गौरतलब है कि नगर पंचायत डिंडोरी में कुल 15 वार्डों में चुनाव हुए, जहां 6 पार्षद कांग्रेस और 6 भाजपा के प्रत्याशी निर्वाचित हुए हैं। इसी तरह तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाज़ी मारते हुए पूरे राजनीतिक समीकरण को और भी ज्यादा रोचक बना दिया है, अब उनके फैसले पर ही भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों की जान अटकी हुई है। पार्टी सूत्रों की मानें तो अभी तक किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है, आने वाले समय में ही परिस्थितियां और स्पष्ट हो सकेगी। स्थितियां को देखते हुए दोनों ही दलों के नेता तीनों निर्दलीय प्रत्याशीयों को कीमती ऑफरों सहित लुभावने वादे, राजनीतिक वर्चस्व बढ़ाने सहित अन्य का संदेश उन तक पहुंचाने की कोशिशें लगातार जारी होगी। इन सबके बीच जिले में लगातार भाजपा का कम होता राजनीतिक वर्चस्व को जिला नेतृत्व की जिम्मेदारी ठहराई जा रही है।



