मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों क़ो जर्ज़र आवास से कब मिलेगी मुक्ति

जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के संरक्षक दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया कि जबलपुर में संभाग का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज अस्पताल है वर्तमान में कॉलेज के पास 300 से अधिक कर्मचारी आवास हैँ इनमें सर्वेन्ट क्वाटर्स की हालत दयनीय हो चुकी है। खपरेल वाली छत से बारिश का पानी टपकता है। आवासों के सामने वाली सड़के जर्ज़र हैँ सड़कों में बड़े बड़े गड्डे हैँ बारिश में इनमें पानी भर जाता हैँ। रात में हालात और भी ख़राब हो जाते हैँ ऐसे में 24 घंटे ड्यूटी के लिए आने जाने वाले कर्मचारियों क़ो बहुत कष्ट उठाना पड़ता हैँ।
संगठन के संरक्षक दिलीप सिंह ठाकुर ने अधीक्षक जी एवं डीन से पत्राचार कर मुलाक़ात का समय माँगा हैँ एवं पत्राचार कर इन आवासोँ क़ो तोड़कर नये भवन तैयार करने की बात कही है। मेडिकल कॉलेज की आवासीय कॉलोनी अभी बिखरी बिखरी सी नजर आती है कॉलेज से कॉलोनी क़ो जोड़ने वाले रास्ते संकरे हैँ और अंधे मोड़ दुर्घटना क़ो निमंत्रण देते दिखाई दे रहे हैँ। मेडिकल कॉलेज कॉलोनी में 300 से अधिक आवास हैँ। जर्ज़र सर्वेन्ट क्वाटर्स की संख्या लगभग 150 है। कम से कम 250 से 300 मकानों के निर्माण की आवश्यकता है। इस हेतु गंभीर मंथन कर मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन क़ो अवगत कराकर राज्य शासन क़ो पूरी योजना भेजी जानी चाहिए। जिसमें चौड़ी और पक्की सड़कें, बच्चों के खेलने के लिए पार्क, वाहनों क़ो रखने के लिए उचित एवं पर्याप्त स्थान साथ ही साथ बिजली -पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी बेहतर इंतजाम हो।
संघ के सत्येंद्र,अंशुल, अरविन्द,जी टी झारिया,अशोक उपाध्याय,आसाराम झारिया,विश्वनाथ सिंह,अजब सिंह,समर सिंह,गंगाराम साहू,आकाश भील, भोगीराम चौकसे,नितिन तिवारी,भास्कर गुप्ता, दुर्गेश खातरकर, ऋषि पाठक,विष्णु झारिया,राजकुमार नेमा, नारायण दास, बलराम मरावी आदि ने उपरोक्त गंभीर विषय पर अस्पताल प्रबंधन क़ो शीघ्र निर्णय लेने के लिए किए गए पत्राचार क़ो सही कदम बताया।



