जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

शहीद स्मारक में चंद्रप्रभा पटेरिया की 96 वीं जयंती समारोह में उस्ताद शुजात खान की मनमोहक प्रस्तुति

जबलपुर दर्पण। संगीत सुनने, समझने के साथ ही जीने का नाम है। जीवन मे यदि संगीत के सुर घुले है तो आपका जीवन सफल है। संगीत तो मेरी आत्मा है। उक्त बातें महान सितार वादक और गायक उस्ताद शुजात खान ने रविवार को शहीद स्मारक गोल बाज़ार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। वे जबलपुर में चंद्रप्रभा पटेरिया जी 96 वी जयंती समारोह में अपनी कला का प्रदर्शन करने आये थे। उन्होंने कहा कि गूगल में जाकर आप संगीत सुन सकते हैं लेकिन तो आनंद आपको लाइव सुनने में आएगा वह आनंद और कहीं नहीं। विदेशों में तो लोग भारतीय संगीत को लाइव सुनने हमेशा तैयार रहते हैं।
महान सितार वादक उस्ताद विलायत अली खान के पुत्र और संगीत विद्यालय के इमदादखानी घराने से ताल्लुक रखने वाले भारतीय संगीतकार और सितार वादक शुजात खान के 100 से अधिक एल्बम रिकॉर्ड किए गए हैं। उन्हें ईरानी संगीतकार काहान कल्होर के साथ बैंड गजल के साथ काम करने के लिए सर्वश्रेष्ठ विष्व संगीत एल्बम के लिए ग्रैमी अवार्ड के लिए नामांकित किया गया था।
शुजात खान की सितार वादन शैली, जिसे गायकी अंग के नाम से भी जाना जाता है, मानवीय संवेदनाओं की आवाज की सूक्ष्मता को दर्षाता है। उनकी संगीत वंषावली सात गौरवषाली पीढ़ियों को अपने में समेटे हुए है। उनके दादा उस्ताद इनायत खान, परदादा उस्ताद इमदाद खान, उनके परदादा उस्ताद साहबदाद खान भारतीय संगीत घराने के जानेमाने नाम हैं।
शुजात खान को पंडित भीमसेन जोषी, उस्ताद आमिर खान, विदुषी किषोरी, अमोेनकर सहित कई महान संगीतकारों के साथ प्रभावित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
शुजात खान ने महज 6 साल की उम्र में जहांगीर आर्ट गैलरी मुंबई में अपना पहला संगीत कार्यक्रम दिया। उन्होनें एषिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में विभिन्न कार्यक्रमों का प्रस्तुतिकरण किया। उन्होंने सवाई गंधर्व संगीत महोत्सव, पंडित जितेंद्र अभिषेकी संगीत समारोह, मैत्रा समारोह सहित विभिनन महोत्सवों में षिरकत दी।
शुजात खान साहब को उनकी असाधारण आवाज के लिए भी जाना जाता है। लय के प्रति उनका दृष्टिकोण काफी हद तक सहज रहता है, जिसका प्रभावी प्रयोग वे लोक गायकी के लिए करते हैं। लाजो लाजो, साथ ही कविता और हजारों ख्वाहिषें उनके प्रसिद्व एलबम हैं।
भारतीय स्वतंत्रता की 60 वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्हें संगीत समारोह में चित्रित किया गया था। उन्होंनें ईरानी संगीतकार केहान कल्होर, पैरामाउंट थिएटर, सिएटल और मेयर्स सिम्फनी थिएटर, डलास के साथ न्यूयार्क के कार्नेगी हॉल में अपना संगीत प्रदर्षन किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट में असेंबली हॉल में भी अपनी प्रस्तुति देकर वाहवाही लूटी थी। उनके एल्बम द रैन को 2004 में ग्रैमी अवार्ड के लिए नामांकित किया गया था।
जनवरी 2000 में बोस्टन हेराल्ड ने वर्ष के शीर्ष 25 आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सेजी ओजावा और लुसियानो पवारोटी जैसे दिग्गजों के साथ सुजात खान को सूचीबद्व किया था। आपको इंग्लैंड में डार्टिगन स्कूल ऑफ म्यूजिक, सिएटल में वाषिंगटन विष्वविद्यालय और यूसीएलए में अतिथि संकाय के रूप में आमंत्रित किया जाता है।
उन्होनें अग्रणी हिंदुस्तानी गायक उस्ताद राषिद खान के सथ सफल जुगलबंदी के लिए कर्ष काले जैसे विविध कलाकारों के साथ व्यापक संगीत कार्यक्रम किए हैं। सैक्सोफोन पर टिम रीस, पियानो पर केबिन हेज, ताल पर कर्ष काले, गायन पर कटायौन गोदरजी, सितार पर उस्ताद शुजात खान, बास पर कार्ल पीटर और तबले पर योगेष समसी मेलेंज बैंड ने पूरे भारत में घूम घूम कर प्रस्तुति दी। उन्होंनें 2014 में फारसी पारंपरिक संगीत एल्बम बियॉन्ड एनी फार्म में भी सहयोग किया।

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