धार्मिक स्थान को पर्यटन स्थल बनाने के निर्णय को अविलंब वापस लें सरकार – तरुण भनोत

श्री सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल के बनाने के निर्णय से नाराज़ पूर्व वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
जबलपुर दर्पण। केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के गिरिडीह में मौजूद तीर्थक्षेत्र व जैन समाज में सबसे पवित्र पारसनाथ पहाड़ी को पर्यटन क्षेत्र घोषित किया है। इसको लेकर जैन समाज को कड़ी आपत्ति है। जैन समाज का मानना है कि पर्यटन क्षेत्र बनने के बाद वहां अवांछित लोग पहुंचेगे और मांसाहार, शराब सेवन के साथ ही अनैतिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी | इस फैसले से जहां देश भर के जैन धर्मलम्बियों के आस्था को ठेस पहुंची है वही जैन समाज के साधुओं ने भी सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार द्वारा इस फैसले को वापिस लेने की की मांग की जा रही है । उक्त आशय को लेकर प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक श्री तरुण भनोत ने निर्णय को अविलंब वापस लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, भारत सरकार में पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्राचार किया है।
प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र में श्री भनोत ने बताया कि जबलपुर सहित पूरे मध्यप्रदेश मे जैन धर्मलम्बियों द्वारा केंद्र सरकार द्वारा लिए गए इस एकतरफा निर्णय पर कड़ी आपत्ति जतायी जा रही है | जैन समुदाय के प्रसिद्ध तीर्थक्षेत्र सम्मेद शिखरजी पारसनाथ (पहाड़ी) को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने के केंद्र सरकार के फैसले का चौतरफ़ा विरोध हो रहा है। मप्र के अमूमन हर दूसरे शहर में इस निर्णय के बाद से ही जैन समाज प्रदर्शन कर, सड़क पर आकर और कलेक्टर सहित सक्षम अधिकारियों को ज्ञापन देकर केंद्र सरकार से अपना फैसला वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
श्री भनोत ने पीएम को प्रेषित पत्र में बताया कि श्री सम्मेद शिखरजी को पर्यटन क्षेत्र घोषित होने से आहत जैन समाज जबलपुर द्वारा भी इस निर्णय के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है | श्री भनोत ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लीकार्जुन खड़गे को भी इस मामले में संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में सरकार द्वारा आस्था के प्रति खिलवाड़ करने वाले इस निर्णय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का आग्रह किया गया है ।



