अतिशेष के नाम पर भी खेल

त्रुटिपूर्ण अधूरा आदेश समस्या का हल नहीं
जिला शिक्षा अधिकारी से की मांग
जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया कि ट्रांसफर के बाद खामियों को दूर करने और शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से एक पत्र जारी हुआ जिसमें लिखा कि उन शालाओं की जानकारी दी जावे जो एक शिक्षकीय हैँ। उन शालाओं की जानकारी दी जाये जो शिक्षक विहीन हो गयी हैँ।उन प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं की जानकारी दी जाये जो एक दूसरे के नजदीक हों। शून्य शिक्षकीय शालाओं की जानकारी दी जाये। अतिथि शिक्षकों का मांग पत्र संकुल प्राचार्य भेजें उनकी भर्ती होगी। उन शालाओं की भी जानकारी मंगाई जाये जहाँ बच्चों की दर्ज संख्या कम और शिक्षक अधिक हों। माध्यमिक शालाओं में विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था युक्ति युक्तिकरण द्वारा की जाये। कई शालाओं में एक ही विषय के तीन तीन शिक्षक हैँ तो कहीं किसी विषय का शिक्षक नहीं इन्हें आपस में समायोजित किया जाये। संकुल प्राचार्यों से दर्ज बच्चों की संख्या, पदस्थ शिक्षकों की संख्या,अतिरिक्त शिक्षकों की संख्या, विषयवार शिक्षकों की संख्या मांगकर जहाँ अधिक शिक्षक और कम बच्चे हों वहाँ शिक्षक को अतिशेष मानकर उनका समायोजन किया जाये सी ऍम राइज जैसे मनपसंद शाला चयन का अवसर अवश्य दिया जाये। सम्पूर्ण जानकारी एकत्रित कर समायोजन करने उपरांत सर्वप्रथम पोर्टल अपडेट किया जाये। ग्रामीण क्षेत्र में शैक्षणिक व्यवस्था चरमराई हुई हैँ ट्रांसफर के बाद स्कूल खाली हो गए शहर में वर्षों से जमे शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र में शैक्षणिक समायोजन के तहत भेजा जाये। प्रदेश में सबसे बड़ा विभाग शिक्षा विभाग है।इस विभाग में पूरे प्रदेश में अनियमितता का आलम हैँ पूरे प्रदेश के विभिन्न जिलों में कहीं विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की संख्या कम हैँ तो कहीं शिक्षकों की संख्या अधिक हैँ जबकि विद्यार्थियों की संख्या कम हैँ। शैक्षणिक समरसता की कमी हैँ। शिक्षा विभाग की शैक्षणिक व्यवस्था का रहा सहा बंटाधार ट्रांसफर ने करवा दिया।और तो और रिलीविंग ज्वॉइनीग के खेल ने रही सही कसर पूरी कर दी।बार बार दिशा निर्देशों के बदलने से जैसे सी ऍम राइज,उत्कृष्ट विद्यालय एवं एक शिक्षकीय शालाओं के शिक्षकों को रिलीव ना किया जाये इसने भी खेल बिगाड़ा। प्रदेश के कई एक शिक्षकीय शालाओं के शिक्षक रिलीव कर दिए गए तो कहीं पद रिक्त ना होने पर भी शिक्षकों को ज्वाइन करवा लिया तो कई ने स्वतः ट्रांसफर निरस्त करवा लिए। ये उन शिक्षकों के साथ कुठाराघात है जिन्हें वास्तव में ट्रांसफर की आवश्यकता थी वे अटक गए। संगठन के सिंह ठाकुर,चंदा सोनी, पुष्पा रघुवंशी, आशा सिसोदिया, माया सोयाम, सुरेंद्र जायसवाल,महेश मेहरा,जी आर झारिया, सरोज कोल, गीता कोल, शांति टेकाम, योगिता नंदवेश्वर, पूर्णिमा बेन,संदीप परिहार, प्रेमवती सोयाम, अंजनी उपाध्याय, वीरेंद्र दुबे, त्रिलोक सिंह, सुधीर गौर, कमलेश दुबे, राशिद अली, शायदा खान अर्चना भट्ट, रेनू बुनकर, अनुराधा नामदेव, सुमिता इंगले,दुर्गेश खातरकर,आदेश विश्वकर्मा,अजब सिंह,अजय श्रीपाल, डेलन सिंह,जागृति मालवीय,मोदित रजक, जीतेन्द्र रजक, ब्रजेन्द्र सिंह,आदि ने जिला शिक्षा अधिकारी एवं स्थानीय प्रशासन से पत्राचार किया और जिला शिक्षा अधिकारी से उपरोक्त मांग पर चिंतन तथा विचार-विमर्श करके पारदर्शिता के साथ पहले अतिशेष शिक्षकों का पूर्ण पारदर्शिता के साथ समायोजन करने को कहा है और चौपट एवं बेपटरी हो चुकी शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने का अभिनव प्रयास करने की मांग की।



