पूर्व सैनिकों की आक्रोश रैली।

पूर्व सैनिकों की आक्रोश रैली।
स्वर्गीय आशुतोष और उसके परिवार को अब भी है, न्याय का इंतजार।’
जबलपुर। अंग्रेजी में एक कहावत है डिले जस्टिस डिनाइड जस्टिस।
देर से मिला हुआ न्याय भी अन्याय के बराबर होता है। कुछ ऐसा ही घट रहा है,अधारताल में रहने वाले चौबे परिवार के साथ। माता पिता के बुढ़ापे का इकलौता सहारा, तीन बहनों का अकेला भाई, आज इस दुनिया में नहीं रहा। इस दुख की घड़ी में जिन लोगों को परिवार के साथ तालमेल बिठाकर एक दूसरे का सहारा बनना था वही लोग आशुतोष की मृत्यु के लिए जिम्मेदार नजर आ रहे हैं।
पीड़ित पिता सेवानिवृत्त पूर्व सूबेदार श्यामसुंदर चौबे ने अपने बेटे की की मृत्यु को एक दुर्घटना ही मान लिया था लेकिन जब बेटे के मोबाइल को उन्होंने देखा तो उन्होंने पाया की दुर्घटना के ठीक पहले उनके बेटे ने कई बार पुलिस को कॉल किया था। यानी बच्चे को अपनी जान का खतरा साफ नजर आ रहा था। इस घटनाक्रम में मोबाइल एक अहम कड़ी है। उसमें मौजूद डाटा, इस घटनाक्रम के रहस्यों से पर्दा उठा सकता है। मगर समस्या इस बात की है, कि पुलिस ने आज तक इस अहम सबूत पर ध्यान नहीं दिया।
बहुत से ऐसे सवाल हैं जिनका उत्तर अभी पुलिस के द्वारा खोजा जाना बाकी है। लेकिन पीड़ित को न्याय ना मिलता देख उनके साथ खड़ा पूर्व सैनिक संघ आन अब आक्रोशित हो गया है बार-बार ज्ञापन देने और अधिकारियों से न्याय की मांग करने के बावजूद न्याय मिलता ना देख सभी सैनिकों ने श्यामसुंदर चौबे के पक्ष में एक विशाल आक्रोश रैली का आयोजन किया गोरखपुर चौकी प्रभारी सहदेव साहू के साथ उपस्थित एसडीएम महोदया को राष्ट्रपति और देश के सभी प्रमुख व्यक्तियों के नाम ज्ञापन सौंपा।
यह बड़े दुख और चिंता का विषय है। कि किसी को न्याय पाने के लिए इतनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़े। इससे यह पता चलता है,कि हमारी न्याय व्यवस्था और पुलिस के काम करने का तरीका सवालों के घेरे में है।
संघ के अध्यक्ष रजनीश सिंह ने अधिकारियों से इस विषय में चर्चा की और जल्द से जल्द कार्यवाही की मांग की।



