लोक साहित्य पर वैचारिक संगोष्ठी संपन्न

जबलपुर दर्पण । संस्कार भारती जबलपुर द्वारा वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर संगोष्ठी पर सार गर्वित प्रकाश डाला । आधुनिक साहित्य की जड़ में लोक साहित्य बसता है लोक कला लोक जीवन शैली संस्कृति को लोक साहित्य में बताते हुए संगोष्ठी के सारस्वत वक्ता आचार्य हरिशंकर दुबे ने साहित्य को उद्घाटित किया, लोक साहित्य में लोकोक्तियां सूत्र मुहावरे कथनों लघु कथाओं कहानियों का बड़ा महत्व है आधुनिक शिक्षा प्रणाली में लोक साहित्य पर प्रकाश डालते हुए विजय तिवारी किसलय ने बताया कि इसे जरूर पढ़ाया जाना चाहिए। विभिन्न मुहावरों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी कैसे हम अपने बुजुर्गों से सुनते एवं देखते आ रहे हैं वह हमारी लोक संस्कृति का अच्छा उदाहरण है हमारी संस्कृति से ही साहित्य जुड़ा है यह कहना है संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राजेश पाठक प्रवीण का ।संगठन और उद्देश्यों के बारे में विस्तृत जानकारी निखिल देशकर ने दी ।संस्कृति के प्रचार प्रसार एवं नवयुवकों में चेतना जागृत करने की बात श्रीमती चंद्र प्रकाश वैश्य ने की। लोक साहित्य हमारे समाज की संस्कृति का बोध कराता है यह कहना है विजय नेमा अनुज का महामंत्री संजय सागर सेन ने संस्कार भारती के उद्देश्य और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी एवं आभार व्यक्त किया इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन द्वारा 51000 की सम्मान राशि प्राप्त श्री सुरेश विचित्र का भी सम्मान किया मंच संचालन संतोष नेमा संतोष द्वारा किया गया उपस्थित जनों ने संगोष्ठी के विषय पर भूरी भूरी प्रशंसा की, जिसमें मात्र शक्तियों सहित अनेक बुद्धिजीवियों ने श्रोता पंती में भाग लिया ।



