जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

जन सेवा व सार्थक सहयोग, अनमोल जिंदगी का संतोष

जगदीश प्रसाद शुक्ला का जन्मदिवस 24 मार्च

जबलपुर दर्पण। जीवन ईश्वर की अनमोल कृति है जहाँ मानव का सतत कर्मशील होना और लोगों के मन मे जगह बना लेना सार्थक जीवन की मिसाल है। जगदीश प्रसाद शुक्लाजन्म 24 मार्च 1934 को ग्राम बिहर, परियट पनागर में ग्रामीण क्षेत्र के प्रसिद्ध बैधराज,सरपंच पिता-गोजी लाल शुक्ला, माँ-श्रीमती उजयारी देवी शुक्ला के घर आंगन में हुआ था। ऐसे ही जगदीश प्रसाद शुक्ला ग्रामीण परिवेश में रहकर शासकीय विधालय पनागर से शिक्षा ग्रहण की थी । अपने विवेक और लगन से मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग में पटवारी पद पर नियुक्त हुए । जबलपुर जिले के कई पटवारी हलकों में अपनी लगन और निष्ठा से कार्य किया । उनकी कार्य कुशलता को देखते हुए पटवारी जगदीश प्रसाद शुक्ला को वर्ष 1982 में जबलपुर जिले के सर्वश्रेष्ठ पटवारी के पुरस्कार से तत्कालीन कलेक्टर श्री आर0 एन0 बैरवा ने सम्मानित किया था । अपनी पद प्रतिष्ठा का दायित्व निभाते हुए 31 मार्च 1992 को पनागर पटवारी हल्का से सेवानिवृत्त हुए । जन सेवा का संकल्प लेकर फिर से नई पारी की शुरूआत की मध्य प्रदेश में पहली बार ग्राम न्यायालय की स्थापना हुई थी, अपनी सहज जीवन शैली और अनुभव से ग्राम न्यायालय सुहागी के ग्राम प्रधान न्यायाधीश के पद पर सर्वसम्मति से मनोनीत किये गए अपनी कार्यकुशलता निष्ठा और समर्पित सेवाभाव से ग्रामीण अंचलों में लगातार 5 सालों तक ग्राम प्रधान न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दी । उनके अनुभव एवं सहज सुलभता से क्षेत्रीय किसान जन राजस्व मामलो की सलाह भी लिया करते थे । उन्हें चौपड़ खेल में महारत हासिल थी। वे मध्य प्रदेश किसान संगठन की ऒर से पनागर ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में किसानों की हर उलझनों को सहजता से सुलझाने का काम करते हुए पेंशनर समाज पनागर शाखा के संरक्षक व मार्गदर्शक भी मनोनीत किए गए 87 साल तक की उम्र में भी बहुत सक्रिय,ऊर्जावान रहे । आज भी पूरा क्ष्रेत्र उन्हें पटवारी जी के नाम से और हमें पटवारी जी के बेटों के नाम से पहचाना जाता है । ये हमारे लियेहमरे लिए सौभाग्य की बात है । परिवार की समस्त जिम्मेदारी से फुर्सत जन जन की सेवा, सलाह, सहयोग जीवन के अंतिम समय तक करते रहे। अब बिन पिता के सब सूना सा लगता है ।बस उनकी तस्वीर और अमर स्मृतियाँ ही हम परिवार जनों का एक सहारा है जो बुझे मन को उनके होने का एहसास कराती है आज सब कुछ तो है लेकिन वो नही, जिनकी वजह से हम है, उनके बिना मन, घर आंगन, सूना सा होगा है । अब उनके भरे पूरे परिवार में धर्मपत्नी-श्रीमती भागवती देवी शुक्ला, सुपुत्र- शिव कुमार शुक्ला, अजय शुक्ला, अनिल शुक्ला, पुत्रवधु- श्रीमती राधा शुक्ला, श्रीमती प्रभा शुक्ला, श्रीमती मनीषा शुक्ला, नाती- अनुराग- गरिमा शुक्ला, आयुष-अंशिका शुक्ला, नातिन-निशा,निधि,अर्चना, सुषमा,प्रियंका, अंकिता, मोनिका, नेहा, प्रिया, श्रीयम अग्रिमा, के साथ नात रिश्तेदार भी इस कामना के साथ ईश्वर से प्रार्थना करते है कि हम सबके आदर्श रहे पिता जगदीश शुक्ला की छत्रछाया और आशीर्वाद हम सब पर हमेशा बना रहे । शत शत नमन, वंदन, श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे है। आपका आदर्शो से भरा जीवन हम सब के लिए प्रेरणापुंज एवं अनमोल धरोहर है । अब आपकी मधुर स्मृतियाँ ही हमारे लिय पूज्यनीय, वन्दनीय है । आपका असीम आशीर्वाद ही हम सब के जीवन को अखण्ड प्रकाशवान करता रहेगा । जन्मग्राम बिहर परियट में जगदीश प्रसाद शुक्ला की पावन स्मृति में देवो के देव महादेव शंकर भगवान के मंदिर कर परिवार जन पूजा अर्चना कर जगदीश शुक्ला जी को याद करेंगे ।

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