तालाबों के संरक्षण- संवर्धन हेतु प्रशासन उठाए समुचित कदम

जबलपुर दर्पण। गोंडवाना कालीन 52 तलावों वाले जबलपुर शहर में अब मात्र 36 तालाब ही शेष बचे हैं । बाकी 16 तलाबों को को भू माफिया और अन्य अतिक्रमणकारियों ने निगल लिया है। शेष बचे 36 तालाब भी बड़ी सीघ्रता से अतिक्रमण की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। जल संवर्द्धन, स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय “वाक् एंड क्लीन “ संस्था के प्रतिनिधियों ने आज कलेक्टरेट में जन सुनवाई के दौरान अपर कलेक्टर श्री एस. एस. मीणा को जबलपुर के 36 तालाबों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन हेतु एक ज्ञापन सौंपा । वैज्ञानिक शोध पर आधारित जानकारियों से युक्त ज्ञापन में जबलपुर के तालाबों को ऐतिहासिक जल प्रणाली एवं जल संरचना का अद्भुत उदाहरण बताया गया है । इन 36 तालाबों के अतिरिक्त नगर के आसपास 20 और बड़े बड़े जलाशय हैं जिन्हें तत्काल बचाने की आवश्यकता है ।पिछले 5 दशकों में जनसंख्या वृद्धि एवं गाँवों से पलायन के कारण जलस्रोतों का अंधाधुंध शोषण किया गया । तालाबों में आने वाले वर्षा जल के मार्गों को कालोनियाँ बनाकर अवरुद्ध कर दिया गया । तालाबों को पूरकर कूटरचित बटांकन कर बड़े बड़े भवन बना लिए गए ।इन अवैध और अनैतिक अतिक्रमणों के परिणामस्वरूप तालाबों का क्षेत्र, उनका स्वरूप और पानी की गुणवत्ता बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं ।ज्ञापन में कहा गया है कि पानी के अनमोल ख़ज़ाने ये तालाब सार्वजनिक संपत्तियाँ हैं ।समय समय पर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने स्थानीय प्रशासन, प्रदेश शासन को तालाबों को बचाने हेतु कड़े आदेश पारित किए हैं ।वर्तमान जल संकट, अल्प वर्षा एवं जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचने के लिये जबलपुर के इन 36 तालाबों को बचाना कितना आवश्यक है ।आशा है प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करेगा। ज्ञापन सौंपते समय श्री मदन दुबे, एड.अरविंद दुबे ,डॉ. एच. पी.तिवारी व संस्था के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।



