लीगल भी सोशल भी अनुशासन ही उन्नति का आधार हैं

जबलपुर दर्पण। बहुत ही उच्च कोटि के विद्वान वकील है अभि जी । जो भी केस मिला हर केस में सफलता प्राप्त कर ली । वकालत की किताबों के जैसे कीड़े हों। निष्ठावान और परिश्रमी । हर केस में न दिन देखते न रात। अद्वितीय रणनीति लिए जुट जाते । जैसे सफलता का सोपान इनके लिए बना हो और शिखर इनके लिए प्रतीक्षारत हो। और सचमुच में इन्होंने अपार सफलता प्राप्त कर भी ली । वकालत करते करते विशिष्ट बन गए। नियम, कानून, अनुशासन को अपना जीवन बना लिया। समय प्रतिबद्धता ने ज्यों इनके जीवन मैं स्थायित्व प्राप्त कर लिया हो। एक पूर्ण विधिक और आयन संगत हो गए अभि जी। इन्हें न्यायचित न्यायविद न्यायपूर्ण कहना गलत न होगा। अभि जी , होनहार प्रज्ञ विधिसम्मत अनुशासित, निष्ठावान कर्मठ ऊर्जावान कर्मक्षम विनयशील आदि गुणों से संपन्न हैं। अपने और अपनों के कार्यो में व्यस्त होने पर भी मिलनसार हैं। निर्भीक और उचित सलाह देने वाले जो भी कहना सामने कहना पीठ पीछे कभी चर्चा तक न करना। मैं और अभि पहले जबतक नमस्कार तक सीमित थे, उनके सोशल न होने की चर्चा सुनता रहता था। प्रातः जब मैं कॉलोनी परिसर में टहलता था तो वह अपने आज्ञाकारी डॉगी को लेकर जब दूर तक घुमाने ले जाते थे, उसी समय मेरी उनसे हाय हैलो होती थी। मधुर मुस्कान लिए अभि जी मुझे कभी भी अभिमानी नहीं लगे। जो भी थोड़ी बहुत बातें होती थी हंस-हंसकर, सामयिक विषय पर और सारगर्भित ही होती थी। जिससे कुछ न कुछ नया सीखने,समझने मिलता था। एक दिन उन्हें कॉलोनी के प्रमुख का दायित्व सौपा गया। चार्ज सँभालते ही परिसर के रखरखाव और सुरक्षा के नियमों में कुछ विसंगतिया को देख उनके अंदर का न्यायविद होने का भाव जाग उठा । कॉलोनी के कुछ सदस्य समय पर सहयोग राशि नहीं दे रहे और कुछ कई महीनों से सहयोग राशि नहीं दे रहे, ये विसंगति कॉलोनी के सम्भ्रांत, वुद्धिजीवी लोगो के रहते हुए उन्हें खलने लगी । कॉलोनी के हर काम सुचारू रूप से हो और प्रत्येक सदस्य समय पर सहयोग राशि दें इसके लिए उन्होंने कुछ निर्णय लिये। कुछ कठोर तो थे लेकिन सभी के हितैषी शुभचिंतक भी थे। अभि जी लीगल थे इसलिए पूर्णतः लीगलिटी लाने का प्रयास करने लगे । इस कार्य में सोशलिटी का अभाव लगने लगा। परिसर की भलाई हेतु अपने निर्भीक स्वभाव और आमने सामने सच कहने के कारण उन्होंने लोगो की नाराजगी भी मोल ले ली। अन्य कॉलोनी वासियों को उनका यह तरीका पसंद नहीं आया और उन्हें लगा कि उनके आत्मसम्मान को ठेस लग रही है। जबकि देखा जाए तो अभि जी कहीं गलत नहीं थे और न ही रहवासी गलत थे। बातों बात पर भरम की स्थिति बनने लगी, उनके कार्यों में जब हस्तक्षेप होने लगा तो उन्होंने कॉलोनी प्रमुख का अपना दायित्व ही छोड़ दिया। उनकी कार्यशैली लीगल सोशल में फंसकर रह गई । लोगों की धारणा बन गई कि अभि जी बड़े अभिमानी और कठोर स्वभाव के लीगल व्यक्ति हैं। लेकिन लोगों को नहीं मालूम था की अनुशासित जीवन जीने वाले नियम प्रतिबद्ध रहते हैं। वो किसी का बुरा नहीं करते और कार्य नियम पूर्वक हो यही चाहते हैं। अभि जी से मेरी लगातार बातचीत होती रहती हैं। वार्तालाप के दौरान उन्होंने बताया कि अपने जीवन में वे विश्व के लगभग 43 देशों का सुखद भ्रमण कर चुके हैं। अभी फिलहाल कुछ माह पूर्व वे दुबई और यूके में अपनी जीवन संगनी के संग घूम कर आए हैं। बहुत हंसते-हंसते और आनंद पूर्वक अपने विदेश भ्रमण के किस्से भी उन्होंने खूब सुनाये। और बड़े गर्व से कहते है कि अब इंडियन्स का पता लगते ही वहां के लोग बहुत सम्मान से देखते और व्यवहार करते है । उनके बारे में मैं बहुत कुछ जान चुका था । जो व्यक्ति निष्ठापूर्वक अपनी आय कर रहा हो और हर्षोल्लास से अपने पर अपने परिवार पर खर्च कर रहा हो , वो व्यक्ति लीगल तो है ही, लेकिन सोशल भी कम नही है। इसलिए मैं कह सकता हूं कि मेरे अपने अजीज अभि जी लीगल भी है और सोशल भी है।



