अनिता कहां है ?

अनिता विद्यालय गई है बच्चों को पढ़ाने, अनिता वृंदावन धाम गई है प्रभु श्रीकृष्ण के दर्शन करने ,अनिता रामेश्वरम तीरथ धाम गई है , अनिता श्री राधा के रूप में अपनी प्रेम भक्ति श्री कृष्ण को दर्शाने नाट्य प्रतियोगिता में गई है , अनिता नृत्य प्रतियोगिता में गई है, अनिता गरबा में गई है, अनिता गायन प्रतियोगिता में गीत गाने गई है , अनिता किटी पार्टी में गई हैं , अनिता अपनी हम बोली बहन सरिता के घर गई है । जब जब मैंने सोसाइटी में भ्रमण करते हुए अनिता के पति राजकुमार से पूछा कि अनिता कहां गई है तो प्रत्युत्तर में उनके ये उत्तर थे।
ब्याह लायक दो बच्चों की मां श्रीमती अनिता इस आयु में इतनी उर्जावान । अकल्पनीय । बहुआयामी प्रतिभाओं की मल्लिका श्रीमती अनिता शिक्षण में, धार्मिक कार्य में, गृहस्थ कार्य में, सांस्कृतिक कार्य में, सामाजिक कार्य में,
हर क्षेत्र में निरालस्य गतिवान उर्जावान सक्रिय स्फूर्त
मयी कर्मठता की एक जीती जागती मूर्ति लगती है। चेहरे पर थकान का कोई चिन्ह तक नहीं होता। एक चिर परिचित मुस्कान लिए हर समय सम्मान देते मिलती है।एक दिन मैंने श्रीमती अनिता से दिनचर्या पूछ ही ली। श्रीमती अनिता जी ने बताया कि मैं सुबह 5 बजे उठकर स्नानादि कर प्रभु की आरती करती हूं। प्रायः रविवार और गुरुवार को कदली वृक्ष की पूजा करती हूं। मैं हर तीज त्योहार पर उपवास रखती हूं। पूजा करने के पश्चात मैं सुबह की शिफ्ट में विद्यालय पहुंच जाती हूं जो कि मेरे घर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके लिए मैं घर से पैदल चलकर फिर मेन रोड से बस पकड़ कर जाती हूं । दोपहर को घर आने के पश्चात थोड़ा आराम करके मैं अपने गृहस्थ कार्य में लग जाती हूं और जहां जहां मेरे कार्यक्रम जो पूर्व में निर्धारित होते हैं, मैं खाना बनाकर वहां चली जाती हूं । जब प्रभु के प्रति मेरे मन में प्रेम भक्ति का भाव उमड़ता है तो मैं झट से अकेली ही कभी वृंदावन धाम कभी रामेश्वरम कभी बालाजी कभी बद्री धाम कभी किसी धाम पहुंच जाती हूं । अब तो मेरे साथ मेरी महिला मित्र भी जाने लगी हैं । कर्म परायणता की पराकाष्ठा के संग संग मैंने इनमें धर्म परायणता की भी पराकाष्ठा देखी । कुछ समय पूर्व हमारी सोसाइटी के पार्क में श्रीमद् भागवत कथा पुराण का एक धार्मिक आयोजन हमारी सोसाइटी की एक श्रीकृष्ण जी की परम प्रिय भक्त दंपति ज्योत्सना राकेश द्वारा हुआ । वृंदावन धाम से एक सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य मधुरम जी पधारे थे। अपनी सुमधुर वाणी से इतना सुंदर गाया की तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गूंज उठा। श्रीमती अनिता का जन्मदिन 15 अगस्त को आता है। अपना जन्मदिन वो विकलांग बच्चों के बीच में जाकर मनाती है बहुत अच्छा लगता है और बहुत शांति प्राप्त होती है। सहनशीलता, प्रेम, धैर्य और ममता से सनी श्रीमती अनिता का धर्मनिष्ठ और कर्मनिष्ठ का यह रूप नारी कितनी प्रतिभायुक्त और शक्तिशाली हो सकती है दर्शाता है। मैं अनिता को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखता हूं।आज कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली हर नारी का हमें हृदय से सम्मान करना चाहिए, मेरा यही मानना है।अपने संगीतमय कथा से उन्होंने सबको मंत्रमुग्ध कर रखा था। अनिता राधा कृष्ण के प्रसंग के दौरान झूम उठती पूरे 7 दिन भक्ति के भाव में डूबी रही। सोसायटी के पार्क में कार्यक्रम था। अपने आप को संवारकर रखना श्रीमती अनिता का अत्यधिक शौक है। श्रीमती अनिता का कहना है कि अच्छे कपड़े पहनने से व्यक्तित्व में निखार आता है और सभ्यता मन में झलकने लगती है । गायन की शौकीन श्रीमती अनिता ने बहुत अच्छा हृदयस्पर्शी गाना गाकर भी सुनाया ।



