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अखिल भारतीय हिन्द क्रान्ति पार्टी

अखिल भारतीय हिन्द कान्ति पार्टी भारत की व्यवस्था परिवर्तन का राष्ट्रीय आन्दोलन चला रही है। भारत के सभी विधि नियम, कानूनों की समीक्षा एवं उनका पालन करने के लिए एक न्याय व्यवस्था जरूरी है। 1947 के बाद टाईम पास सरकारें आईं, जिनमें नैतिकता, जबावदेही एवं एक्शन का अभाव था। हिन्द क्रान्ति पार्टी चाहती है कि नागरिक प्रोटेक्शन एक्ट, सभी व्यक्तियों की पदीय दायित्वों की जबावदेही तथा कार्यपालिका एवं न्यायपालिका का पृथक करण जरूरी है। इसी प्रकार देश की अदालतों में 3 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित है, जिनको एक वर्ष में 80 प्रतिशत तक कम करने का पार्टी द्वारा निर्णय लिया गया है। देश की पूरी न्याय व्यवस्था, निर्णय, अपील, कोर्ट फीस तथा बिना जवाबदेही तथा बिना टाईम लिमिट के चल रही है। अनुच्छेद 144 के तहत सभी सिविल एवं न्यायिक प्राधिकारियों द्वारा उच्चतम न्यायालय की सहायता में कार्य किया जाना भारत के राज्य क्षेत्र के सभी सिविल और न्यायिक अधिकारी उच्चतम न्यायालय की सहायता में कार्य करेंगे। लेकिन समस्या यह है, कि सुप्रीम कोर्ट के पास प्रशासनिक पावर नहीं है और अधिनस्थ न्यायालयों के पास न्यायिक अधिकार नहीं है। इसी कारण पूरे देश में न्यायिक अराजकता का माहौल पैदा हो गया है और देश की करीब आधी आबादी न्यायालयों में फँसी हुई है. उनको तवाही से बचाना हमारा एक उद्देश्य भी है।

इसके लिए हम लोगों ने भारतीय सर्वोच्च न्यायालय एवं सभी राज्यों के उच्च न्यायालय तथा केन्द्र सरकार एवं सभी राज्य सरकारों तथा भारतीय राष्ट्रपति एवं सभी राज्यपालों को पहले ही ज्ञापन भेज चुके हैं। अब पार्टी एक्शन में आ चुकी है और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के माध्यम से एक जनहित याचिका फाइल करने जा रही है। इसके बाद भारतीय सर्वोच्च न्यायालय एवं सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों में जनहित याचिकाएँ फाईल की जायेंगी एवं पार्टी के द्वारा राष्ट्रीय परिषद् एवं प्रदेश परिषदों का भी गठन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विदेशी कानूनों की समीक्षा कर 2022-23 के कानूनों का निर्माण करना है और 2022-23 को अराजकता, आतंकवाद, भ्रष्टाचार तथा बेरोजगारी मुक्त भारत बनाना है।

एक महीने बाद म.प्र. उच्च न्यायालय में जनहित याचिका फाइल करना है. जिसमें राजस्व न्यायालय में ऐसे कर्मचारी, जिन्होंने विधि की डिग्री हासिल नहीं की और न्यायिक कार्य कर रहे हैं उनको बदलने के लिए याचिका फाइल करना है। क्योंकि अपराधी को ही न्याय करने का अधिकार मिल जाता है। कलेक्टर एवं अन्य

राजस्व अधिकारी जो राज्य सरकार के कस्टोडियम होते हैं एवं कानून और स्थ बनाने के लिए उनके पास मजिस्ट्रियल पावर होते हैं, फिर उन्हीं के द्वारा राज्य सरकार के विरूद्ध मुकदमे सुना जाता है, जो न्यायिक सिद्धान्त के विपरीत है।

इसी प्रकार देश की अदालतों में करीब 5 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित है। म.प्र. उच्च न्यायालय के माध्यम से विवादों के निराकरण के लिए दावा का दायरा, दावे में पक्षकारों की तलवी जबाबदावा, गवाह सबूत एवं निर्णय तथा निर्णय के पालन करने की वर्तमान प्रक्रिया में सुधार कर एवं कानून की किताबों से अपील शब्द को हटाकर शिकायत शब्द जोड़ने के लिए भी जन-आन्दोलन चलाया जा रहा है. क्योकि न्याय की कभी अपील नहीं होती, जिसकी अपील होती है वह अन्याय है और अन्याय करने वाला व्यक्ति न्यायाधीश कैसे हो सकता है? इसी प्रकार न्याय मांगने के लिए यदि शासन शुल्क लेता है तो वह व्यापार है, इसी प्रकार अपने श्रम के बदले पारिश्रमिक लेने वाले व्यक्तियों द्वारा अपनी जबावदेही न लेना. अपने पेश के प्रति बेईमानी है।

हिन्द क्रान्ति पार्टी यह चाहती है, कि देश में विवादों के निराकरण की अंतिम समयसीमा एक वर्ष कर दी जाये। उपर्युक्त सभी बातों के लिए हम सहयोग आन्दोलन चलाते हैं, असहयोग आन्दोलन नहीं क्योंकि जनता के द्वारा, जनता के लिए जनता का शासन है और जनता को चाहिए कि अपने श्रम के बदले पारिश्रमिक लेने वाले हर व्यक्ति को साधन, सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध कराये, जिसके बाद उसकी हर समस्या का निराकरण विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका में बैठे हुए लोग कर सकें।

हिन्द क्रान्ति पार्टी जो जनहित याचिका म.प्र. हाईकोर्ट एवं देश के सभी राज्यों के उच्च न्यायालय तथा भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में एक माह बाद लावा चाहती है उसमें केन्द्र सरकार एवं सभी राज्य सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट, बार कौंसिल ऑफ इंडिया तथा सभी जॉच एजेंसियों को पार्टी बनाकर वे याचिकाएँ फाईल की जायेंगी एवं मीडिया के माध्यम से और जनसम्पर्क कर सभी लॉ कॉलेज, अन्य कॉलेज, सभी उद्योग, व्यापारिक कृषि एवं अन्य संगठनों को समीक्षा के लिए, जिसमें उनके विचार, सुधार या आलोचना के लिए भेजा रहा है, इसी प्रकार मा एवं देश में पंजीकृत बहुत सी राजनैतिक पार्टियां, सामाजिक संगठन एवं व्यापारिक संगठन हमारा सहयोग करने के इच्छुक हैं एवं कर भी रहे हैं।

सभी मीडिया बंधुओं से अनुरोध है कि जनहित के कार्य में हमारा सहयोग प्रदान करें और जन-जन तक न्यायिक सुधार, कानूनों का सुधार एवं अन्य जो जनहित एवं राष्ट्रहित के मुद्दे हैं उन्हें जनहित तक पहुँचाने हेतु निवेदन है।

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