केवट जयंती पर समरसता सेवा संगठन ने किया विचार गोष्ठी एवँ सम्मान समारोह का आयोजन
पूज्य ज्ञानेश्वरी दीदी ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा समरसता के विचार को पुनर्जीवित करना प्रसंशनीय कार्य

जबलपुर दर्पण । जबलपुर सामाजिक समरसता के परिपेक्ष्य में समरसता सेवा संगठन द्वारा केवट जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी एवँ सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पूज्य ज्ञानेश्वरी दीदी एवँ सारस्वत वक्ता वरिष्ठ समाजसेवी श्री शिवनारायण पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी श्री अशोक बिल्थरिया, संगठन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन मंचासीन थे।विचार गोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए ज्ञानेश्वरी दीदी ने कहा समरसता की विचार धारा को पुनर्जीवित करने का कार्य समरसता सेवा संगठन द्वारा किया जा रहा है यह प्रसंशनीय है।
दीदी ज्ञानेश्वरी ने कहा किसी भी राष्ट्र का कल्याण करने उसमे उस राष्ट्र की जनजातिया होती है। उन्होंने कहा हमारे देश मे एक राष्ट्र पुरूष की कल्पना की गई है जिस तरह मनुष्य के पांच कोश होते है उसी तरह राष्ट्र पुरुष के भी पांच कोश होते है जिनमे पहली होती है राष्ट्र की सीमाये, दूसरी उनके प्राण के रूप में जनजाति है, और इनका सामर्थ्यवान और शक्तिशाली होना आवश्यक है राष्ट्र पुरुष का तीसरा कोश उसकी भाषा होती है। राष्ट्र पुरूष का चौथा कोश उसकी संस्कृति होती है और पांचवा कोश उसका धर्म होता है। जब हमारे राष्ट्र की सीमायें सुरक्षित होगी हमारी जनजातियों के बच्चे शिक्षित होंगे हमारी भाषा एक होगी हमारी संस्कृति का ज्ञान अगली पीढ़ी को होगा और हम अपने धर्म को लेकर आगे बढ़ेंगे तो निश्चित ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की उन्नति होगी। जब तक यह सारे अंग सुज्जित और पुष्ठ नही होंगे राष्ट्र आगे नही बढ़ सकता है।उन्होंने कहा हमारे जितने भी आराध्य हुए वह अलग अलग जाति से आते थे और उन्होंने समाज को एक करने के लिए कार्य किया।उन्होंने कहा आज हम महात्मा केवट की जयंती मना रहे है और केवट जी पूर्व जन्म में राजा थे जिन्होंने त्रेता युग मे केवट के रूप में जन्म लिया। इसी तरह पूर्व काल मे किसी तरह की जाति नही थी किन्तु किसी कारण वश यदि उन्हें राज्य से बाहर निकाला गया तो वह अलग अलग कार्य करने लगे तो उन्हें कार्य के हिसाब से जाति वर्ग में बंट गए और कुछ लोगो ने जाति समुदाय में देश को बांट दिया पर प्रसन्नता है कि समरसता सेवा संगठन द्वारा सामजिक सेवा के परिपेक्ष्य में समरसता जैसे महत्वपूर्ण कार्य को कर रहे है।
कार्यक्रम के सारस्वत वक्ता श्री शिवनारायण जी पटेल ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक अपने विचारों और कार्यो को ले जाने की हमारी सनातन काल से परम्परा रही है और समरसता हमारी सनातन परंपरा रही है किंतु कालांतर में इससे हम दूर होते गए और जैसा कि हमारे संतो, महापुरुषों और आराध्य ने जो संदेश सभी के लिए दिया था वह जाति समुदाय विशेष में सीमित होकर रह गया और आज समरसता सेवा संगठन द्वारा सामजिक समरसता के लिए प्रसंशनीय और अनुकरणीय कार्य की शुरुआत की गई है और केवट जी की जयंती हम मना रहे है और केवट जी श्रम के प्रतीक है और भगवान श्रीराम भाव के प्रतीक है और भगवान ने इस अवसर पर केवट जी के सिर पर हाथ रख और वही से रामराज्य की शुरुआत हुई क्योकि गंगा पार कराने वाले पर भव सागर पार कराने वाले ने अपना हाथ रखा है। राम के सहारे हम भी पार लगेंगे और दूसरों को भी पार लगाएंगे।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवँ स्वागत भाषण देते हुए समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन ने कहा सब सबको जाने और सब सबको माने के धेय्य को लेकर समरसता सेवा संगठन द्वारा सनातन धर्म के ऐसे आराध्य की जन्मजयंती को मानने लिया जिन्होंने सर्वसमाज के उत्थान के लिये संदेश दिया। ऐसे हमारे आराध्य के संदेश को जन जन तक पहुँचाने का कार्य करना ही ही उद्देश्य है और विगत 13 अप्रैल को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के कर कमलों से इन कार्यक्रमों की शुरुआत हुई है इसी क्रम में आज भक्त केवट जी की जयंती पर विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है।समरसता सेवा संगठन के सदस्य महेंद्र रघुवंशी ने केवट जी के त्रेता युग मे उनके जन्म और प्रभु श्रीराम के की सेवा के प्रसंग के बारे में विस्तार से बताया।कार्यक्रम के दौरान गढ़ा रामलीला में विगत 25 वर्षों से केवट जी का अभिनव करने वाले मोतीलाल शिवहरे के साथ समाज के नर्मदा प्रसाद बर्मन, डॉ महेश सोंधिया, दिनेश केवट,सुजीत सोंधिया ,श्याम लाल कहार, डॉ हरीश कुमार केवट, मोहन कश्यप, गणेश सोंधिया, कैलाश कश्यप, रामचरण भगवत, आरडी रैकवार, एमएल केवट, राजकुमार केवट, मंयक केवट, अन्नू केवट, रामकुमार रैकवार, का अंग वस्त्र एवँ श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन सचिव उज्ज्वल पचौरी एवँ आभार अरुण अग्रवाल ने व्यक्त किया। इस अवसर पर मथुरा प्रसाद चौबे, अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, संजय गोस्वामी, डॉ आनंद राणा, पंकज दुबे, राजीव राठौर, विनीत तिवारी, राजेश तिवारी, चंद्रशेखर शर्मा, कुंजी जौहरी, शरद ताम्रकार, संतोष झारिया,राजेश ठाकुर, सौरभ श्रीवास्तव, बालकृष्ण पटेल, विजय यादव, विवेक चौबे, विनीत यादव, सनी रोहरा,रामेश्वर चौधरी, अभिषेक तिवारी, राहुल दुबे, सुरेंद्र शर्मा, आर्यन मिश्रा, गौरव मांझी, अविनाश जैन, पुष्पराज पटेल आदि उपस्थित थे।



