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दिव्य ज्योत स्थापना के दौरान अखंड रामधुन में महत्माओं का लगा समागम

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। जिले के जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत खरगहना गांव में स्थित प्रसिद्ध नाथ महाराज के आश्रम में दिव्य ज्योत स्थापना के दौरान अखंड राम कीर्तन का आयोजन किया गया था। बताया गया कि कार्यक्रम में शामिल होने आसपास के ग्रामीणों के अलावा दूरदराज से साधु संत भी अखंड राम कीर्तन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हुए थे, जहां गुरुवार को विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश से डिंडोरी तक हजारों किलोमीटर दूरी तय करने के बाद महात्मा ने अखंड दिव्य ज्योत जलाकर डिंडोरी लाए हैं। ज्वाला देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है, मंदिर की खोज हजारों वर्ष पहले पांडवों के द्वारा होना बताया गया है। पौराणिक कथाओं में मां भगवती के 51 शक्तिपीठों में से एक ज्वालामुखी मंदिर काफी प्रसिद्ध है, इसलिए मंदिर को जोता वाली मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर माता सती की जीभ गिरी थी, जहां माता ज्वाला के रूप में विराजमान तथा भगवान शिव यहां उन्मत भैरव के रूप में स्थित हैं। मंदिर का चमत्कार यह है कि यहां कोई मूर्ति नहीं, बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रहीं 9 ज्वालों की पूजा की जाती है। लेकिन आजतक इसका कोई रहस्य नहीं जान पाया है कि आखिर यह ज्वाला यहां से और कैसे निकल रही है। कई भू-वैज्ञानिक ने कई किलोमीटर की खुदाई करने के बाद भी यह पता नहीं लगा सके कि यह प्राकृतिक गैस कहां से निकल रही है। ज्वाला देवी मंदिर के रोचक तथ्य तो यह है कि आज भी इस ज्वाला को कोई भी बुझा नहीं पाया। ज्वाला देवी मंदिर में बिना तेल और बाती के नौ ज्वालाएं जल रही हैं, जो माता के नौ स्वरूपों का प्रतीक हैं। वहीं चमत्कारी स्थान से महात्मा ने दिव्य ज्योत जलाकर लाए हैं, जो खरगहना के आश्रम में स्थापित की गई है, जो आने वाले समय में निरंतर जलती ही रहेगी।

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