जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

परीक्षा केंद्रों की दूरी से नन्हें मुन्ने परेशान

जबलपुर दर्पण। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 5 वीं -8 वीं बोर्ड की पूरक परीक्षाओं में परीक्षा केंद्रों की दूरी से नन्हें मुन्ने बच्चों एवं अभिभावकों /पालकों की फिर फ़जीहत हुई । राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल के आदेश के तहत पूरक परीक्षा दिनांक 22 जून से आयोजित होने जा रही है किन्तु मुख्य परीक्षा के परिणाम देखने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं लगा कि इन छोटे -छोटे नन्हें -मुन्ने बच्चों के परीक्षा केंद्रों की दूरी अधिकतम 3 किलोमीटर से ज्यादा ना हो। पुनः परीक्षा में संकुल केंद्र वा परीक्षा केंद्रों की दूरी का ध्यान नहीं रखा जा रहा है जिसमें बच्चों एवं पालकों को परीक्षा केंद्र तक जाने में दिक्कत होगी जबकि जिले स्तर पर बैठे आला अधिकारियों द्वारा इस गंभीर विषय पर इन नन्हें मुन्ने बच्चों की व्यावहारिक परेशानी से निजात दिलाने हेतु कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जा रहा है। नन्हें मुन्ने बच्चे 5 से 8 किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचें इस हेतु वरिष्ठ अधिकारी तो केवल प्रधानाध्यापक को ही दोषी ठहरायेगा। रामपुर संकुल के अंतर्गत आने वाले तिलवारा स्कूल के बच्चों का परीक्षा केंद्र महाराष्ट्र हाई स्कूल और घूँसौर संकुल के अंतर्गत घाना स्कूल के बच्चों का परीक्षा केंद्र तेवर हायर सेकेंडरी स्कूल रखा गया है जिनकी दूरियां 3 किलोमीटर से बहुत अधिक है जो अव्यवहारिक है।ऐसे ही अनेक उदाहरण है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार आनन-फानन में आदेश निकालना,ज़मीनी हक़ीक़त से वाकिफ नहीं होने से इन नन्हें मुन्ने बच्चों के परीक्षा परिणाम पर गहरा प्रभाव होगा। अतः आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल एवं जिले के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों से मांग है कि पूरक परीक्षा के केन्द्रों की दूरी अधिकतम 3 किलोमीटर तक रखीं जावे ताकि समस्त नन्हें मुन्ने बच्चे परीक्षा में सहजता से शामिल हों सकें।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर, जी आर झारिया, अरविन्द विश्वकर्मा, संजय उपाध्याय, शिवेंद्र परिहार, भास्कर गुप्ता, ऋषि पाठक, दुर्गेश खातरकर, विश्वनाथ सिंह, धर्मेंद्र परिहार, नितिन तिवारी, आदेश विश्वकर्मा, आकाश भील, माधव पाण्डेय, शैलेश पंड्या, रवि विश्वकर्मा, अफ़रोज़ खान, रवि केवट, सुरेंद्र परसते, महेश मेहरा, विष्णु झारिया, कमलेश दुबे, भोजराज विश्वकर्मा, अजब सिंह, सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, इमरत सेन, डेलन सिंह, पंकज हल्दकार, आसाराम झारिया, समर सिंह, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, बहादुर पटेल, बैजनाथ यादव, दिलीप साहू, प्रशांत श्रीवास्तव,अंजनी उपाध्याय, चंद्रभान साहू, पवन सोयाम, रामकिशोर इपाचे, रामदयाल उइके, मनोज कोल, गगन पटेल, अर्चना भट्ट, पुष्पा रघुवंशी, चंदा सोनी, कल्पना ठाकुर, रेनू बुनकर, सिया पटेल, अम्बिका हँतिमारे, ब्रजवती आर्मो, योगिता नंदेश्वर, पूर्णिमा बेन, सुमिता इंगले, शायदा खान, गीता कोल, राजेश्वरी दुबे, सरोज कोल, शबनम खान, रौशनी महोबिया इत्यादि ने परीक्षा केंद्रों की अत्यधिक दूरी को दृष्टिगत रखते हुए व्यवहारिकता के अनुरूप पुनः विचार कर संशोधन की मांग की है।

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