भगवान महादेव के नाम करोड़ों की जमीन को तहसीलदार ने कर दिया निजी व्यक्ति के नाम

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी में जहां भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड बन रहे हैं, लेकिन यह एक अजीबो गरीब मामला करोड़ों रुपए के भूमि से जुड़ा हुआ हैं। गौरतलब है कि आजादी के पहले भगवान महादेव के नाम की जमीन को तहसीलदार ने भ्रष्टाचार करते हुए निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज कर दिया गया, लेकिन अब यह बेशकीमती भगवान महादेव के नाम की जमीन अब कलेक्टर के हवाले होगी, मंदिर प्रबंधन के लिए सरकारी समिति का गठन भी किया जाएगा। एसडीएम डिंडौरी रामबाबू देवांगन ने न्यायालय से आदेश जारी कर तहसीलदार द्वारा वर्ष 2015 में मंदिर की जमीन को लेकर जारी आदेश को निरस्त कर दिया है। करोड़ों की जमीन के मालिक भगवान शिव का मंदिर लंबे समय से उपेक्षा का शिकार था, आदेश जारी होने के बाद अब संबंधित स्थान और मंदिर को सामूहिक प्रयास से विकसित करने की पहल करने की बात एसडीएम कह रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
जिला मुख्यालय के यूनियन बैंक के सामने मुख्य मार्ग से लगी हुई वर्तमान में एक एकड़ से अधिक की जमीन जोकि पूर्व में महादेव शंकर मूर्ति के नाम से दस्तावेजों में दर्ज थी। आरोपों के मुताबिक 7 मई 2015 को तहसीलदार डिंडौरी द्वारा आदेश जारी कर सर्वहाराकार की वसीयत के आधार पर जमीन को दूसरे के नाम दर्ज कर दी, इसी आदेश को एसडीएम न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। जानकारी अनुसार 23 जून 1948 को जिला मुख्यालय निवासी आशुतोष गुप्ता के दादा स्व. भोला प्रसाद गुप्ता के द्वारा लगभग एक एकड़ से अधिक भूमि भगवान शिव का मंदिर बनाने सहित धर्मशाला और धार्मिक आयोजन के लिए दान की गई थी। आरोप है कि 3 एकड़ से अधिक जमीन एक अन्य व्यक्ति ने भी दान में दिया गया, जहां अब ज़मीन बिकने के बाद यहां मकान बनाने लगे हैं। बताया गया कि संबंधित जमीन में सर्वहाराकार के तौर पर पहले श्री बाबा राम स्नेही थे, उनके बाद सर्वहाराकार में मीराबाई का नाम दर्ज हो गया, बाद में मीराबाई की वसीयत के आधार पर डिंडोरी तहसीलदार ने मीरगंज चौराहा भेड़ाघाट जबलपुर निवासी अनूप व्यास का नाम दर्ज कर दिया। इस मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष गुप्ता का आरोप था कि लगभग एक एकड़ शेष जमीन को बेचने की तैयारी थी, इसी के चलते उनके द्वारा यह मामला एसडीएम न्यायालय में लगाया गया। संबंधित जमीन जहां भगवान शिव के नाम से दर्ज थी, वहां एक भगवान शिव का जर्जर मंदिर भी है। समय बदलने के साथ यहां न तो धार्मिक आयोजन होते हैं और न ही अन्य लोग जाकर पूजा पाठ कर सकते हैं, मंदिर का परिसर बाउंड्री से घिरा हुआ है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि मंदिर की न तो देखभाल की जाती है और न ही यहां पूजा अर्चना होती है, इसी के चलते उनके द्वारा यह मामला एसडीएम न्यायालय में लगाया गया। बताया गया कि इसी मंदिर की जमीन होते हुए खनूजा कॉलोनी की ओर एक पक्की सड़क भी बन गई है। लेकिन अब मामला सामने आने के बाद संबंधित शिव मंदिर को विकसित करने के साथ यहां धर्मशाला सहित धार्मिक स्थान विकसित करने की मांग भी लोगों के द्वारा की जा रही है।



