जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

56 इंच के सीने वाले प्रधानमंत्री को युवा कांग्रेस के 56 सेट चूड़ियां पहनाई

कानून व्यवस्था की विफलता के विरोध में मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस का प्रदर्शन

जबलपुर दर्पण। मणिपुर में पिछले 3 महीने से जारी जातिगत हिंसा एवं हिंसा के नाम पर महिलाओं को निर्वस्त कर घुमाए जाने, गैंगरेप जैसे घृणितकार्य तथा राज्य में कानून व्यवस्था की विफलता के विरोध में मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के तत्वधान में युवा कांग्रेस के रघु तिवारी और अजय रावत के नेतृत्व में आज इलाहाबाद चौक सिविल लाइन में विरोध प्रदर्शन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले को युवा कांग्रेस ने 56 इंच की चूड़ियां पहना कर विरोध प्रदर्शन किया प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं से चूड़ी और प्रधान मंत्री का पुतला छीनने की कोशिश में पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प भी हुई जिसके आक्रोश में कार्यकर्ताओं ने रोड पर चूड़ी फोड़कर कर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की।

विज्ञप्ति के माध्यम से युवक कांग्रेस के प्रलभ सोनी, सौरभ रैकवार, अभिषेक कश्यप ने कहा है कि पिछले 3 महीनों से मणिपुर में हिंसा में झुलस रहा है इसके पीछे मणिपुर सरकार एवं केंद्र सरकार की गलत नीतियों और निर्णय के चलते आज मणिपुर की ये हालत हुई है,इस बीच 19 जुलाई को एक वीडियो वायरल होता है, जिससे पूरा देश हिल जाता है. इस वीडियो में मणिपुर की दो महिलाओं को नग्न अवस्था में भीड़ ले जा रही होती है.ये घटना मणिपुर के थोबल जिले की है जो ढाई महीने पहले की बताई जा रही, चिंताजनक और शर्मनाक बात ये भी है कि जब भीड़ में से कुछ लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया उससे पहले ये महिलाएं पुलिस की निगरानी में थाने ले जाई जा रहीं थी जिन्हें पुलिस द्वारा ही भीड़ को सौंप दिया गया,वायरल वीडियो में भले ही 2 महिलाएं दिख रही हैं, लेकिन महिलाओं की शिकायतों के मुताबिक तीन महिलाओं को भीड़ के सामने निर्वस्त्र होकर चलने को मजबूर किया गया. एक महिला के साथ खुलेआम गैंगरेप किया गया, गैंगरेप का विरोध करने और अपनी बहन को बचाने की कोशिश करने पर महिला के 19 साल के भाई को मार दिया गया. इतना ही नहीं इन महिलाओं के से एक के पिता को भीड़ में से कुछ दरिंदे पहले ही मार चुके थे।

ढाई महीने से ज्यादा का वक्त होने के बावजूद मणिपुर हिंसा और नफरत की उस ढेर पर बैठा है, जिसमें भविष्य में और भयानक विस्फोट हो सकता है, मणिपुर की जो स्थिति इन ढाई महीने में बनी है, वो काफी नहीं है ये बताने के लिए कि मणिपुर की एन. बीरेन सिंह सरकार हालात को काबू करने में पूरी तरह से विफल रही है।

इस स्तिथि में देश का प्रधानमंत्री घड़ियाली आंसू बहाते लेकिन कड़ी कार्यवाही करने में नाकाम होते।

ऐसे हालातों के लिए संविधान में की गई है अनुच्छेद 356 की व्यवस्था-एड. श्रीकांत विश्वकर्मा ने कहा कि अनुच्छेद 356 आम भाषा में इसे ही राष्ट्रपति शासन के नाम से हम जानते हैं अब जो मणिपुर के हालात हैं, उसको देखते हुए इतना तो मानना ही पड़ेगा कि वहां नागरिक अधिकारों को लेकर संविधान में जो व्यवस्था की गई है, उसके मुताबिक राज्य का शासन नहीं चल रहा हैं। राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए राज्यपाल से रिपोर्ट मिलने की बात अनुच्छेद 356 में की गई है, हालांकि राज्यपाल से रिपोर्ट नहीं मिलने की स्थिति में भी राष्ट्रपति को ये लगे कि राज्य में संविधान के मुताबिक नहीं चल रहा है तो वे उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं।

हर वक्त 56 इंची सीने का जाप अलखने वाले प्रधानमंत्री बड़ी-बड़ी डींगे हाकते है लेकिन जब आंतरिक सुरक्षा को लेकर कड़ी कार्यवाही की नौबत आती है तो वह तुम दबा कर बैठ जाते।

मणिपुर हिंसा में अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है मां के कई अधिकारियों एवं मंत्रियों के घर में आग लगा दी गई है लेकिन जब महिलाओं की निर्वस्त्र वीडियो सामने आया देशभर में विरोध की लहर सामने आआई तो तब प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर बोलने सामने आए।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिव अग्रवाल, अमरचंद बावरिया, लखन ठाकुर, रविंद्र कुशवाहा, अनुराग तिवारी, सिद्धांत जैन, मुकेश श्रीवास्तव, शिशिर नन्होरिय, श्रीकांत विश्वकर्मा, देवकी पटेल, अनुभा शर्मा, आभा पटेल, श्याम बिहारी, अलकेश गुप्ता, पंकज पटेल, संदीप जैन, अदनान अंसारी, सिमरप्रीत नेगी, सक्षम ताम्रकार, यशो बड़कूल, मोनू खंडेलवाल, शिशांत सिंह ठाकुर, ममतल सेलुमन, राहुल बघेल, सागर शुक्ला, रिज़वान अली कोटी, रॉबिन तिवारी, मोहसिन खान, रिंकू बदलानी, डब्बू ठाकुर, विकास विश्वकर्मा, प्रतीक गौतम, सक्षम यादव, सोनू सुंदरानी, आरिफ पठान, रवि खत्री, लखन श्रीवास्तव, इमरान खान, पियूष सिंह चीनू, अमन वर्मा, रीना राज, अभय सिंह ठाकुर, ओम यादव, प्रियासं विश्वकर्मा आदि सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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