भगवद कृपा से ही संत दर्शन मिलते हैं:राजेश्वरानंद

जबलपुर दर्पण। संत का जीवन दीन दुखियों की सेवा ही भगवद सेवा विचारधारा में रत रहता है।परमात्मा जब किसी मनुष्य पर किरपा करते हैं तो उसे संत से मिलवा देते हैं क्योंकि संत ही है जो मनुष्य को मानसिक,सामाजिक,आध्यात्मिक पीड़ाओं से निजात दिलाने में सक्षम है। यह उदगार स्वामी श्री राजेश्वरानंद महाराज ने शाहदरा गोरख पार्क स्थित श्री राजमाता झंडेवाला मंदिर में सावन पुरुषोत्तम मास में श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर आयोजित संत सम्मेलन में व्यक्त किए।
इस अवसर पर स्वामी जी ने कहा कि परमात्मा जब किसी मनुष्य पर किरपा करते हैं तो उसे संत से मिलवा देते हैं। इतिहास भरा पड़ा है उन घटनाओं से जिसमे संतो द्वारा अनेक मूर्ख,दुष्ट लोगों का जीवन परिवर्तन संत मिलन से हुआ है।
महामंडलेश्वर दाती महाराज ने इस अवसर पर कहा कि “हमे सनातनी संस्कारों को समझते हुए अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है।शुभकर्मों की श्रंखला में सबसे उत्तम माता,पिता,गुरुजनों की सेवा करे।मोबाइल की वजह से अपरिचित लोगों से दिखावी नजदीकियां बन रही है लेकिन नजदीक रिश्तों में दूरियां बढ़ रही है।अपना हाथ जगन्नाथ को याद रखते हुए प्रातः उठते ही सर्वप्रथम कर दर्शन करें।
कथा व्यास आचार्य मनोज कृष्ण जी द्वारा श्रीराम,कृष्ण जन्मोत्सव की कथा को संतो से जोड़ते हुए कहा कि रामजन्म संत कृपा का प्रसाद तो वासुदेव स्वयं में ही संत थे विपरीत परिस्थितियों में जिनके धैर्य के चलते उनके घर कृष्णावतार हुआ।
आयोजित संत सम्मेलन में जिसमे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अनेक संत महात्माओं ने भाग लिया। जिसमें असोला शनिधाम ट्रस्ट के पीठाधीश्वर अनंत विभूषित महामंडलेश्वर निजस्वरूपानंद दाती महाराज,शमहंत कन्हैया गिरी महाराज,महंत मुनिराज महाराज,महंत सूरज गिरी महाराज, महंत सूरज गिरी, महाराज महंत हितेश्वर गिरी महाराज,श्महंत भोला गिरी महाराज,महंत सतीश दास महाराज एवं महंत प्रज्ञानंद महाराज आदि प्रमुख थे।



