प्रसूताओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्यशाला का आयोजन

जबलपुर दर्पण। गर्भधारण के दौरान अक्सर महिलाओं में बहुत सारी मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। उनके लिए यह बहुत ही कठिन दौर होता है। उनके मनोविज्ञान को समझना बहुत ही आवश्यक है। यदि समय रहते उनके मनोभावों को नहीं समझा गया तो भविष्य के लिए समस्या विकराल रुप धारण कर सकती है। उक्त बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय मिश्रा ने कही। वह होटल जैक्शन में मानसिक स्वास्थ्य विभाग की एक कार्यशाला में मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे। एक दिवसीय चलने वाली इस कार्यशाला में विश्वव्यापी संस्था जवाइगो, फाग्सी आदि ने भी योगदान दिया, कार्यशाला में मनोरोग व स्त्रीरोग चिकित्सक नर्सिंग स्टॉफ, आशा और उषा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए डॉ रत्नेश कुरारिया ने बताया कि उनके लिए यह ट्रेनिंग बहुत ही आवश्यक हैं, क्योंकि प्रसूताओं के बीच आप सभी को सेवाएं देना होती है। जब आप सम्पूर्ण ट्रेनिंग लेंगी तब गर्भवती महिलाओं का न सिर्फ उपचार बल्कि उनकी देखभाल भी उचित ढंग से कर पाएंगी। ट्रेनिंग में दिल्ली से पहुंचे जवाइको के डॉ जिनेश कुवार्डो, बेंगलोर से डॉ सुन्दर नाथ, डॉ शुभांगी आदि ने गर्भवती महिलाओं में होने वाले मनोरोगों की जानकारी देते हुए उनका कैसे उपचार किया जाए इसकी जानकारी दी, कार्यशाला के दौरान एल्गिन अस्पताल की अधीक्षिका डॉ मीता पाराशर, मेडिकल कॉलेज मनो चिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ जीआर चंदानी, फारसी की प्रेसीडेंट डॉ मानविका, डॉ पुष्पा पांडे, जवाइको की डॉ रुपल श्रीवास्तव सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित थे।



