चिटलर अमित खम्परिया और अमित द्विवेदी को मिली जमानतें हाईकोर्ट से रद्द

जबलपुर दर्पण। ज्ञात हो कि अमित खम्परिया और उसके मैनेजर अमित द्विवेदी ने कई लोगों को टोल प्लाजा में पार्टनर बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये लेकर हड़प लिए ,जबकि एन. एच.ए. आई. के नियम अनुसार कोई भी टोल ठेकेदार किसी को पार्टनर नही बना सकता है उक्त नियमावली को खम्परिया और अमित द्विवेदी किसी को नही बताते थे और धोखे में रखकर लोगों के साथ बाकायदा अनुबन्ध पत्र निष्पादित करके रकम ले लेते थे ।खम्परिया का मास्टरमाइंड साथी अमित द्विवेदी जो अपने आप को खम्परिया का लीगल एडवाइज़र बताता था जबकि दिल्ली ही नही समूचे देश के एन. एच. ए. आई. के साथ होने वाले अनुबंधों में वो ही खम्परिया की तरफ से अधिकृत होकर हस्ताक्षर करता था ।ये दोनों आरोपी आपसी मिलीभगत करके विभिन्न जिलों के लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और टोल प्लाजा में बहुत फायदा देने का लालच देकर लाखों-करोड़ों रुपये बैंक खाते में ले लेते थे और जब वह व्यक्ति हिसाब की बात करता तो उसको ढेर सारी पेनाल्टी बताकर घाटा बता देते थे ।80 साल के गोपीकृष्ण माहेश्वरी उत्तर प्रदेश निवासी को खम्परिया ने 2 करोड़ का चूना टोल में पार्टनर बनाने के नाम पर लगा दिया और जब बुजुर्ग ने हिसाब मांगा तो जबलपुर बुलाकर उनको अपने आफिस में बंद करके बंदूक अड़ा कर पैसे हड़प लिए बुजुर्ग की रिपोर्ट में दोनों आरोपियों और बन्दूकधारी के खिलाफ 420,406,386 का मामला संजीवनी नगर थाने में दर्ज हुआ । इसी प्रकार राइट टाउन निवासी सचिन गुप्ता के साथ भी दोनों ने फर्जीवाड़ा किया था सचिन गुप्ता जी को इन लोगों ने एन एच ए आइ की फ़र्ज़ी शीट देकर ये बता दिया कि आपको 48 लाख का नुकसान हो गया है जब प्रार्थी ने उक्त शीट पुलिस को दी और उसकी जांच हुई तो दिल्ली से प्राप्त रिपोर्ट में ये बताया गया कि वह शीट एन एच ए आई ने जारी ही नही की है ।दोनों आरोपियों के विरुद्ध मदन महल थाने में आरोप सही पाए जाने पर अपराध क्रमांक 86/22 धारा 420,467,468471,474,109,112,114,120बी के तहत मामला पंजीवद्ध हुआ था ।जिन्होंने इस पर भी कोर्ट को गुमराह करते हुए जमानत प्राप्त कर ली थी ।और लगातार एक के बाद एक धोखाधड़ी के अपराध करने लगे ।आरोपियों ने अपने पिता अनिरुद्ध की जगह कोमल पांडेय को कई बन्दूकधारी के साथ मिलकर 5 साल की सजा मे मण्डला जेल भेज दिया इसी प्रकार कई आरोपियों को बदल-बदल कर जेल भेज दिया ,और न्याय व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी ।अमित खम्परिया के ऊपर चोरी ,लूट ,हत्या ,और धोखाधड़ी के दर्ज़नो अपराध दर्ज हैं। खम्परिया और द्विवेदी को मिली जमानत के खिलाफ सचिन गुप्ता द्वारा पुख़्ता आधार प्रस्तुत करके माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की गई थी जहां तमाम तथ्यों को सुनने के पश्चात उच्च न्यायालय ने दोनों आरोपियों को पूर्व में प्राप्त जमानतें रद्द कर दी।बॉक्स बनावें -दो साल से फरार है खम्परिया पर पुलिस पकड़ नही पाई ,हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा है कि कुर्क करो सारी संपत्ति।
जिस प्रकार माननीय उच्च न्यायालय श्री विशाल धगट जी ने खम्परिया की जमानतें रद्द कर दी और उच्च न्यायालय श्री विवेक अग्रवाल जी ने कुर्की करने के सख्त आदेश पुलिस अधीक्षक जबलपुर को दिए हैं उसी प्रकार माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सत्र न्यायालय के साथ आरोपियों की अदला- बदली के मामले में जमानत की सुनवाई करते समय अमित खम्परिया को मुख्य आरोपी माना जाकर कठोर टिप्पणी की गई है ।फिर भी जबलपुर की पुलिस खम्परिया को पकड़ने में इतनी नाकाम हो रही है ।



