उधर पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने का मसौदा तैयार, इधर न्याय के लिए भटकते कलम के प्रहरी

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। एक तरफ मध्य-प्रदेश की शिवराज सरकार पत्रकारों को सुरक्षा देने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने को लेकर एक कमेटी गठित की है, जिससे अब कैबिनेट में मंजूरी के बाद पत्रकारों की सुरक्षा के लिए एक कानून बन जाएगा। लेकिन यहां आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी में एक पत्रकार से मारपीट व जानलेवा हमले की शिकायत के हफ्ते भर गुजरने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोतवाली पुलिस ने अभी तक अनावेदकों से पूछताछ तक नहीं की है, जिससे कोतवाली पुलिस पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत के हफ्ते भर बाद भी कोतवाली पुलिस द्वारा कार्रवाई न करना पत्रकारों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। गौरतलब है कि देश के चौथे स्तम्भ कहें जाने वाले पत्रकार आए दिन अभद्रता का शिकार हो रहे हैं, देश भर में पत्रकारों पर हमले सहित थानों में फर्जी मुकदमा भी दर्ज होने के मामले में इजाफा हो रहे है। पत्रकार सुरक्षा कानून के बने बिना पत्रकारिता के क्षेत्र में रहकर कार्य करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों 20 सितम्बर लगभग 05 बजे समनापुर तिराहे के पास अमरकंटक रोड स्थित एक होटल पर एक पत्रकार के साथ हुई मारपीट की घटनाक्रम को लेकर जिले के पत्रकारों में आक्रोश है। पत्रकार संगठनों ने बताया कि शिकायत के बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में एसपी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई करने की मांग की जाएगी।



