सांप के जहर से नहीं अंधविश्वास से ज्यादा मरते हैं लोग

जबलपुर दर्पण। शासकीय होम साइंस कॉलेज के प्राणीशास्त्र विभाग में सलीम अली क्लब द्वारा आज विषय विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया l यह आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नंदिता सरकार के निर्देशन एवं विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. साधना केशरवानी के मार्गदर्शन पर हुआ l कार्यक्रम में सर्प विशेषज्ञ विवेक शर्मा ने बताया कि भारत में कुल 343 प्रजाति एवं मध्यप्रदेश में 43 प्रजाति दर्ज है जिसमें जबलपुर के आसपास क्षेत्र में सात प्रकार के विषैले सांप हैं । जिसमे बिग फोर या डेडली फोर नाम से कुख्यात भारत के चार जहरीले सांप कोबरा (स्पेक्टेड), करैत (कॉमन व बैन्डेड), रसल वाइपर, सॉ स्केल्ड वाइपर है । जिनमें कोबरा व करैत न्यूरोटॉक्सिक होते है तथा वाइपर हीमोटॉक्सिक होता है । कार्यक्रम के तकनीकी विशेषज्ञ एवं मंच संचालन कर रहे डॉ. अर्जुन शुक्ला बताते हैं कि सांप के डंसने के बाद मिचली, उल्टी और घबराहट होने लगती है। साथ ही ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, डंसने के स्थान पर सूजन आ जाती है और खून के थक्का बनने की प्रक्रिया थम जाती है। हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लक्षण विष के एंजाइम ‘फास्को लिपेस ए-2’ के करण होते हैं । विष के असर को कम करने के लिए एंटी स्नैक वेनम का इस्तेमाल किया जाता है ।
सांप के काटने में क्या करे-
- शांत बैठे – सबसे पहले तो अपने आपको शांत रखे, तथा दिल के धड़कन को समान्य अवस्था में रखे। जिससे जहर शरीर में ज्यादा नहीं फैलेगा।
- काटने वाले सांप को पहचाने – जिस सांप ने काटा है उसे मारने में समय व्यतीत न करे बल्कि सांप की पहचान करे या हो सके तो उसकी एक फोटो ले ले। इससे डॉक्टर को फायदा होगा और वो जान पाएगा की पीड़ित को क्या देना है ।
- काटने वाले स्थान से कसत कपड़े या गहने निकाल दे वरना वहां सूजन हो सकती है और साथ में उत्तक को नुकसान पहुंचा सकती है ।
- तुरंत अस्पताल ले जाए- रोगी को जितनी जल्दी हो सके अस्पताल ले जाए, वरना रोगी के बचने की संभावना कम हो सकती है।
- खून के रुक जाने के बाद उस स्थान को साबुन और गुनगुने पानी से धो दे। लेकिन बहते पानी से ना धोए।
- छोटे बच्चे, वृद्ध और अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों में जहर का असर गंभीर हो सकता है, इनके उपचार में देरी न करें।
सांप के काटने में क्या ना करे- - तांत्रिक का सहारा ना ले- झाड़ फूंक से कोई रोगी ठीक नहीं हो सकता । अतः तांत्रिक का सहारा ना लेकर डॉक्टर का मदद ले।
- जहर चूस कर बाहर ना निकाले- ये काम आपके और पीड़ित दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।
- घाव को ना काटे- काटने से खून ज्यादा बह सकता है और साथ में ये घाव को और खराब कर सकता है।
- पीड़ित को शराब ना पिलाए- कुछ व्यक्ति पीड़ित के दर्द को कम करने के लिए शराब पिलाते है जोकि खतरनाक है।
आभार प्रदर्शन विभाग की श्रीमति रश्मी सिंग्रोरे (आयोजन सचिव) एवं फीडबैक एवं पंजीयन कार्य डॉ. श्रद्धा खापरे ने किया, कार्यक्रम में डॉ. नम्रता, डॉ. वर्षा, डॉ. नीतू, डॉ. सूजा, डॉ. अजेन्द्र एवं बायोटेक विभाग की समस्त फैकल्टी आदि उपस्थित रहे l कार्यक्रम में लगभग 200 छात्राओं ने अपनी सहभागिता दी l



