भोलेनाथ के विवाह की तैयारियां शिव के लिए शक्तियों ने रखा कलश

जबलपुर दर्पण। सुबह से ही लाखों लोग भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं जहां जगह-जगह भंडारा भी विभिन् संगठनों द्वारा प्रदाय किया जाता है, महाशिवरात्रि की तैयारियां के तहत भरतीपुर से विराट कलशयात्रा निकली, शिव के लिए शक्तियों ने अपने सिर पर जल कलश निकला। पीत वस्त्र में महिलाओं में भोले की भक्ति के लिए श्रद्धा के भाव दिखे। भरतीपुर से निकलने वाली बारात की झाकियां सजनी शुरू हो गई हैं। यहां बारात से लेकर विदाई तक की रसम होती है। यहां शिव विवाह की लंबी परंपरा है। संस्कारधानी में भी भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के वैवाहिक उत्सव को महाशिवरात्रि के दिन प्रतिवर्ष के अनुसार इस बार भी विशेष रुप से मनाने की तैयारी मंदिरों में चल रही है, विवाह के कार्ड भी छपे भरतीपुर शक्ति मंदिर में होने वाले विवाह यहां पर चार दिन पहले से हो भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के वैवाहिक आयोजन शुरु हो जाता है। महाशिवरात्रि के दिन ही यहां पर रात्रि भगवान भोलेनाथ की बारात भी निकाली जाती है जो शहर के प्रमुख मागों से होते हुए मंदिर में समाप्त होती है। सुबह से ही सबसे ज्यादा श्रद्वालुओं की भीड़ कचनार सिटी में पड़ती है यहां
कई जगह अभिषेक कुछ वर्षों से चार प्रहर के अभिषेक बहुतेरे मंदिरों में हो रहा है। ज्योतिषी पंडित आधुतोष दीक्षित का कहना है कि चारो प्रहर भगवान भोलेनाथ के पूजन अभिषेक का विशेष विधान है, गोधूली की बेला से सुबह चार बजे तक ये अभिषक चलते हैं। भगवान शिव को केतकी का फूल छोड़कर उन्हें सबकुछ अर्पित किया जा सकता है, अभिषेक के समय तांबे के लौटे के बजाए पीला लौटे से जल, दूध, दही चढ़ाना चाहिए। इसी तरह भगवान को धतूरा का फूल बहुत प्रिय हैं सभी को चढ़ाना चाहिए।



