समरसता सेवा संगठन ने किया महाराणा प्रताप जी की जयंती पर विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन

जबलपुर दर्पण। समरस भारत – समर्थ भारत के लिये सब सबको जाने – सब सबको माने, एक अभियान के अंतर्गत समरसता सेवा संगठन द्वारा महाराणा प्रताप की जयंती पर एक विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन मुख्य अतिथि डॉ अखिलेश गुमास्ता, मुख्य वक्ता प्रशांत बाजपेई, समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन की उपस्थिति में आईएमए हॉल राइट टाउन में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अखिलेश गुमास्ता ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा भारत वर्ष में अनेकों योद्धा, महापुरुष, महादेवियो का जन्म हुआ जिन्होंने देश को बाहरी आक्रांताओं के आक्रमण से बचाया उन महापुरूषों में से एक महाराणा प्रताप हुए जिन्हे यदि सर्वश्रेष्ठ योद्धा कहा जाए तो अतिशयक्ति नही होगी। महाराणा प्रताप ने मुगलों से अनेक बार लड़ाई लड़ी और विजय हुए और अपने अंतिम समय में उन्होंने अपने बेटे के हाथ में यह कहकर गद्दी सौंपी की मुगलों के सामने आत्म समर्पण कभी मत करना।
डॉ गुमास्ता ने कहा देश मे इतने आक्रमण हुए किंतु समरसता के भाव के कारण ही आक्रांताओं के इतने आक्रमण के बाद भी भारत की संस्कृति अक्षुण है और महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा आज भी हमे अपनी विरासत, संस्कृति और विचार को बचाना है तो समरसता का भाव हर व्यक्ति में होना आवश्यक है और आज आंदोलन के रूप में इसे लेना होगा तब ही हम सफल होंगे साथ ही हमे आत्मचिंतन करना होगा और पहले स्वयं को समरसता के भाव से जोड़ना होगा फिर समाज को इससे जोड़ना होगा। विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रशांत वाजपेई ने कहा वर्ण व्यवस्था हमारे सनातन काल से है किंतु वर्ण व्यवस्था को जाति व्यवस्था में बदल दिया गया और चार वर्णों को विभिन्न जातियों में बाटने के बाद आक्रांताओं ने जाति के आधार पर टुकड़े कर दिए और ऐसे महापुरुष, आराध्य, संत, देवी को जाति विशेष में ही माना जाने लगा इसीलिए वर्तमान समय में समरसता की सबसे अधिक आवश्यकता है।
श्री वाजपेई ने कहा हिंदू कौन है? हिंदू एक संस्कार है और यह संस्कार भारत भूमि में मिलता है और पश्चिम एशिया के लोगो को बाहर देश के लोग हिंदू कहते है जो हिंद से आया वह हिंदू है। हिंदू कोई धर्म नही बल्कि एक जीवन शैली है। सत्य एक है, चेतना एक है और जीव प्राण एक है जो इस भाव को मान लेता है वह हिंदू है, जो प्रकृति से जुड़ा है वह हिंदू है, जो भूमि को माता माने , जल और वायु को देवता मानकर पूजे और जो सबको अपना माने वह हिंदू है।
उन्होंने कहा आज महाराणा प्रताप जी की जयंती है सब सबको जाने, सब सबको माने को हर घर में ले जाने की आवश्यकता है क्योंकि महाराणा प्रताप, परशुराम, वाल्मिकी, रविदास, गुरुनानक देव, महावीर स्वामी इत्यादि ऐसे महापुरुष किसी जाति विशेष के नही थे बल्कि हर जाति के पूज्य है किंतु हमने इन्हे जाति समुदाय के बांधकर रख दिया जिसका परिणाम हुआ इनके कृतित्व और व्यक्तित्व को हम नही जान पाए इसीलिए हमें अपने इतिहास को जानने की आवश्यकता है और आने वाली पीढ़ी को अपने इन वीर महापुरुषों देवियो की वीरता के बारे में बताना होगा तब ही हम समर्थ भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
कार्यक्रम में रखते हुए समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने कहा समरसता कोई नया विचार नहीं है समरसता तो अनादि काल से भारत की परंपरा है और यह समरसता क्या है इसके बारे में विचार करेंगे तो देखेंगे कि एक दूसरे के साथ खड़े होकर साथ चलते हुए राष्ट्र निर्माण के प्रयास में आगे आए इस हेतु सब सबको जाने और सब सबको माने के ध्येय वाक्य को लेकर समरस भारत से समर्थ भारत बनाने के उद्देश्य को लेकर हमने समरसता सेवा संगठन की शुरुआत की और गत वर्ष के कैलेंडर के कार्यक्रमों को आप सभी के सहयोग से पूर्ण करने के बाद हमने दूसरे वर्ष में भी 7 जयंती पर विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह के 6 कार्यक्रम किए है और आगे भी आपका सहयोग हमे मिलता रहेगा।
संगठन वक्ता के रूप में रवि शर्मा ने महाराणा प्रताप जी की जयंती पर विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कवि श्री गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने काव्य पाठ किया।
सम्मान :- कार्यक्रम के दूसरे चरण में समाज क्षेत्र में योगदान देने वाले विशिष्ठ जनों एवं प्रतिभावान बच्चो का सम्मान किया गया जिसमें रज्जन सिंह बैस, भीष्म सिंह राजपुत, जीपी सिंह, डॉ अशोक चौहान, बसंत सिंह , मृदुला सिंह, सीमा सिंह जुग्गी, अंकिता गिनारा, श्रीमती शोभा सिंह, सुनीता गिडाना, वर्षा मालती सिंह, अनामिका सिंह, शिव कुमार सिंह ठाकुर, गुलाब सिंह ठाकुर, कुलदीप सिंह सिसोदिया, रज्जन सूर्यवंशी, अक्षत सिंह ठाकुर, राशि सिंह राजपुत, स्नेहा ज्योति सिंह, अंशुल सिंह, दीपक सिंह गौर, महेंद्र नारायण सिंह, वीर सिंह राजपुत, दीपक सिंह परिहार, मुकेश सिंह का सम्मान किया गया।
को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर शरदचंद पालन, अभिमन्यु जैन, अनिल तिवारी, रंजीत सिंह ठाकुर, आलोक पाठक, शैलेंद्र सिंह लोधी, अशोक जैन, अशोक नामदेव, आभा साहू, बसंत कुमार सोनी, रामबाबू विश्वकर्मा, धीरेंद्र मिश्रा, चंद्रशेखर शर्मा, सुजीत पटेल, दीपक विश्वकर्मा, रामजी अग्रवाल, पुनीत मिश्रा, सतेंद्र पचौरी, दिनेश राठौर, कुसुम चोबे, सीमा सिंह चौहान आदि गणमान्य जन उपस्थित थे।



