ज्ञान का प्रकाश सभी अंधेरों को खत्म कर देता हैः स्वामी विवेकानंद

जबलपुर दर्पण। अपनी तेजस्वी वाणी के जरिए पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का डंका बजाने वाले स्वामी विवेकानंद जी की 122 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति,मानोआरोग्य,दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद जी के तेल चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. इस अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति,मानोआरोग्य, दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के संचालक साइकोलॉजिस्ट मुकेश कुमार सेन मानस शास्त्री ने आश्रम में उपचार ले रहे नशा पीड़ितों को स्वामी विवेकानंद जी के महान जीवन के विषय में बताया की किस प्रकार स्वामी विवेकानंद जी ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति से भारत की सनातन हिंदू संस्कृति का प्रचार-प्रसार सारे विश्व में किया.स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था ज्ञान का प्रकाश सभी अंधेरों को खत्म कर देता है. स्वामी विवेकानंद एक भारतीय संत और विचारक थे, जिन्होंने रामकृष्ण परमहंस के शिष्य के रूप में अध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की। वे 1893 के शिकागो विश्व धर्म महासभा में अपने प्रभावशाली भाषण के लिए प्रसिद्ध हुए, जिसमें उन्होंने “मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों” कहकर सभी का दिल जीत लिया। वे रामकृष्ण मिशन के संस्थापक थे और उन्होंने वेदांत और योग के ज्ञान को पश्चिमी दुनिया में प्रसारित किया। उनके उपदेश आत्मनिर्भरता, शिक्षा और समाज सेवा पर केंद्रित थे। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रेरणादायक हैं। स्वामी विवेकानंद का जीवन हमें सिखाता है कि ध्यान और विश्वास की ताकत कितनी महान हो सकती है। उनकी शिक्षाओं और जीवन के किस्सों से हमें सच्चे अध्यात्म का अनुभव होता है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें नमन करते हैं और उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। अंत में सभी को स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर आधारित फ़िल्म दिखाई गई और सभी को नशामुक्त रहने की प्रतिज्ञा दिलाई गई.
इस अवसर पर मुकेश कुमार सेन,संतोष अहिरवार,अजय सोनी, मुकेश अहिरवार अन्य सदस्य उपस्थित रहे



