मुश्किलो को जो हंसकर झेल ले वही शिव

जबलपुर दर्पण। भगवान शिव गले में सर्पों की माला पहनते हैं पर कभी भी अपनी शांति का त्याग नहीं करते हैं।सर्पों की माला धारण करना अर्थात अनेक मुश्किलों को अपने ऊपर ले लेना।जीवन है तो मुश्किलें तो आएँगी,बस जो उन्हें हँसके सह लेता है,वह शिव बन जाता है और जो उन्हें नहीं सह पाता वह शव बन जाता है।मुश्किलों का समाधान उनसे मुकर जाना नहीं है अपितु मुस्कुराकर सामना करने में है।
विषम घड़ी में आप अपने चेहरे पर मुस्कान लाने की हिम्मत जुटा पाते हैं तो फिर आपकी आंतरिक शांति भंग करने की किसी में सामर्थ्य नहीं।भगवान शिव के गले में सर्पों की माला हमें यह सन्देश देती है कि मुश्किलें तो किसी को भी नहीं छोड़ती बस आप अपनी हिम्मत और मुस्कान कभी मत छोड़ना।गले में विषमता के विषधर होने के बावजूद भी आनंद और प्रसन्नता में जीना भगवान महादेव से जीवन में सीखना चाहिए उक्त उद्गार नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने नरसिंह मंदिर में श्रावण मास महोत्सव में प्रदोष व्रत में भगवान नर्मदेश्वर महादेव के रूद्राभिषेक षोडशोपचार पूजन में कहे।
श्रावण मास महोत्सव में प्रतिदिन श्री नर्मदेश्वर महादेव की षोडशोपचार पूजन अर्चन, रूद्राभिषेक कर अपराजिता मोगरा चंपा चमेली रजनी गंधा, गुलाब गेंदा फूल पत्ती के साथ बिल्वपत्रों से विशेष श्रृंगार आचार्य रामफल शास्त्री, लालमणि मिश्रा, आशा हीरालाल श्रीवास्तव, डॉ हितेश अग्रवाल , हिमांशु प्रियांशु, रामजी पुजारी सहित भक्त जनों की उपस्थिति रही।



