परिवार से ही होते हैं सांस्कृतिक सामाजिक रुप से संगठित: स्वामी नरसिंह दास

जबलपुर दर्पण। परिवार में आपसी समभाव से सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्कारों को संजोकर अगली पीढ़ी को दे सकते हैं। श्रीकृष्ण ने गोकुल वृंदावन मथुरा फिर व्दारका में परिवारिक भाव से जनमानस को सामाजिक रूप से संगठित होने प्रेरित किया। श्रीकृष्ण रूक्मिणी भक्तों का मंगल करते हैं, दरिद्र नारायण सेवा से लक्ष्मी का आशीर्वाद नारायण की कृपा सदैव मिलती है
उक्त उद्गार नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने कार्तिक मास के अवसर पर गीता धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पुराण के षष्ठम दिवस श्रीकृष्ण रूक्मणी मंगल की कथा में व्यास पीठ से कहे।
भगवान योगेश्वर पारदेश्वर महादेव, श्रीमद्भागवत जी का पूजन अर्चना स्वामी बालकदास महाराज, स्वामी हनुमान दास जी महाराज,अशोक तिवारी. एस एन शुक्ला.शिव कुमार गौतम.
आचार्य रामफल शास्त्री, हिमांशु शास्त्री, राजेन्द्र यादव,प्रियांशु मिश्रा ,राम भगत गुप्ता, लक्ष्मी प्रसाद. कुसुम. रेखा. लखनलाल. गुलाब रानी. डॉ दुर्गेश शिल्पा. डॉ रत्ना श्री कांत., प्रवीण . संदीप. सुनील.प्रदीप मिश्रा, शिवकुमारी. मेवालाल गीता गुप्ता ने किया।
कार्तिक मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पुराण में 21से 27 अक्टूबर तक दोपहर 3 बजे से व्यास पीठ से श्री कृष्ण सुदामा संवाद, परीक्षित मोक्ष की कथा नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह दास जी महाराज श्रवण करायेंगे, नरसिंह मंदिर गीता धाम भक्त मंडल ने उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।



