हरिनाम से होती है समस्त कामनाओं की पूर्ति:स्वामी नरसिंह दास जी महाराज

जबलपुर दर्पण। हरिनाम उस चिंतामणि के समान है जो समस्त कामनाओं को पूर्ण सकता है| हरिनाम स्वयं रसस्वरूप कृष्ण ही हैं तथा चिन्मयत्त्व (दिव्यता) के आगार हैं| हरिनाम पूर्ण हैं, शुद्ध हैं, नित्यमुक्त हैं| नामी (हरि) तथा हरिनाम में कोई अंतर नहीं है । मित्रता निःस्वार्थ भाव से निभानी चाहिए। सुदामा ने श्रीकृष्ण पर आने वाले संकटों को स्वयं लेकर दरिद्रता स्वीकार कर लिया,श्रीकृष्ण ने मित्र भाव को निभाकर समस्त सुखों से परिपूर्ण ऐश्वर्य समृद्ध प्रदान किया। चातुर्मास में भगवान श्रीहरि विष्णु शयन उपरांत शिव से सृष्टि का कार्यभार ग्रहण कर मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है। दरिद्रो की सेवा ही नारायण सेवा है उक्त उद्गार कार्तिक मास की देवोत्थानी एकादशी पर्व के अवसर पर श्रीहरि के गुणगान श्रीमद्भागवत कथा पुराण सप्ताह में व्यास पीठ से रामेश्वरम पैलेस अधारताल में कथा व्यास श्री नरसिंहपीठाधीश्वर डॉ स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने सप्तम दिवस में श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र, भागवत महात्म्य, परीक्षित मोक्ष के प्रसंग पर व्यास पीठ से कहे।
तुलसी महारानी शालिग्राम मंगल पाणिग्रहण संस्कार की समस्त वैदिक परंपरानुसार विधि आचार्य गणों ने संपन्न कराई।
कथा के यजमान राम मिलन साहू . श्रीमती मिथलेश साहू. श्रीमती भगवती साहू ने व्यास पीठ,श्रीमद्भागवत पुराण, श्रीराधा कृष्ण, तुलसी महारानी की षोडशोपचार पूजन अर्चन आचार्य रामफल शास्त्री, कामता प्रसाद शास्त्री,
हिमांशु शास्त्री , प्रियांशु के मार्गदर्शन में वैदिक पूजन अर्चन कराई।
देवउठनी एकादशी, तुलसी महारानी शालिग्राम मंगल परिणय के अवसर पर अंजना मनीष अग्रहरि, जीवन कपिल, विध्येश भापकर, राजेन्द्र यादव, संदीप मिश्रा,आभा दीपक साहू, कैलाश साहू, सतीश साहू, सहित हिन्दू सेवा समिति ने तुलसी महारानी शालिग्राम मंगल परिणय की वैदिक परंपरानुसार पूजन विधि संपन्न की ।



