भगवत भक्ति से मिलता है सकारात्मक परिणाम: स्वामी नरसिंह दास महाराज

जबलपुर दर्पण । नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में 2 दिसंबर से 8 दिसंबर तक आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर कथा व्यास श्री नरसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने व्यास पीठ से भगवान की भक्ति और सत्संग के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। स्वामी जी ने अपने उपदेश में कहा कि, “हमारे आचार-विचार अच्छे होने चाहिए और संगत भी श्रेष्ठ होनी चाहिए। संसार के भ्रमित चक्र से दूर रहते हुए, सांसारिक जीवन के साथ प्रभु के सुमिरन से जुड़ना ही सच्ची भक्ति है। भगवान की भक्ति, सत्संग और मानसिक भक्ति से जीवन में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “भगवान से प्रेम करना ही हमें नरक की यात्रा से बचाता है।”स्वामी नरसिंह दास जी ने यह भी कहा कि मां बच्चों को संस्कार देती है और यह संस्कार जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। वे मानते हैं कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है, और यही जीवन का सत्य है। इस कार्यक्रम में श्रीमद्भागवत महात्म्य कथा, गोकर्ण जन्म की कथा और नर्मदा तट पर श्रीहरि के गुणगान की चर्चा की गई। श्रीमद्भागवत कथा के इस आयोजन में कई प्रमुख संतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। संतों और श्रद्धालुओं द्वारा व्यास पीठ का पूजन भी किया गया। कार्यक्रम में भगवान नरसिंह, गुरु विग्रह, महंत स्वामी रामचंद्र दास जी शास्त्री, जगतगुरु श्री श्याम देवाचार्य जी महाराज और अन्य संतों ने अपना आशीर्वाद दिया। इस दौरान रंजना उपाध्याय, अजय सविता उपाध्याय, पार्षद प्रतिभा भापकर, आचार्य रामफल शास्त्री, हिमांशु शास्त्री, डॉ. संदीप मिश्र सहित कई प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे। स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने सभी भक्तों को भगवान के प्रति निरंतर भक्ति और प्रेम बनाए रखने की प्रेरणा दी ताकि वे आत्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर हो सकें।



