पन्ना दर्पण

प्रशासन की लापरवाही और जल संकट का बढ़ता हुआ खतरा

प्रशासन की लापरवाही और जल संकट का बढ़ता हुआ खतरा 1969 में स्थापित देवेंद्रनगर बांध का ऐतिहासिक महत्व और उसकी बिगड़ती स्थिति

1969 में स्थापित देवेंद्रनगर बांध मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण जलस्रोत है, जो न केवल क्षेत्र के जलस्तर को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि यह बांध गीली मिट्टी से बने राज्य के कुछ विशिष्ट बांधों में से एक है। इस बांध की विशेषता यह है कि यह लगभग 5000 हेक्टेयर यानी साढ़े बारह हजार एकड़ भूमि को सिंचित करता है। इसके अलावा, देवेंद्रनगर बांध से निकलने वाली नहरों का पानी शुद्ध और आरओ के पानी के समान होता है, जो बिना फिल्टर के उपयोग में लाया जा सकता है। यह पानी सुदूर जंगलों से आता है और चिकित्सकों के अनुसार, यह पानी स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी है।देवेंद्रनगर बांध का जल क्षेत्र के जलस्तर को बेहतर बनाए रखता है, जिससे यहां के किसानों और क्षेत्रवासियों को पानी की समस्या नहीं होती थी। विशेष रूप से, जब पानी की आवश्यकता होती है, तो इस बांध से निकला पानी बहुत जल्दी और प्रभावी रूप से सिंचाई के लिए उपलब्ध हो जाता है। यह बांध सतना नदी का भी उद्गम स्थल है, जो इस क्षेत्र को एक और जलस्रोत प्रदान करता है।हालांकि, देवेंद्रनगर बांध और उसकी नहरों की स्थिति अब बिगड़ चुकी है। नहरों की सफाई और रखरखाव में लगातार लापरवाही बरती जा रही है, जिससे नहरों का पानी गंदा और दूषित हो चुका है। इन नहरों से खेतों तक पानी पहुंचाने के बजाय यह पानी नालियों में बह रहा है, जो जल संकट का कारण बन सकता है। खासकर आने वाले गर्मी के मौसम में, जब किसानों को सिंचाई के लिए पानी की अधिक आवश्यकता होगी, तब यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।देवेंद्रनगर बांध के पास स्थित इस क्षेत्र में विशेष त्योहारों और वीकेंड पर पर्यटकों का जमावड़ा लगता है। लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं और इस प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। यह स्थान एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है, और यहां हमेशा पर्यटकों की भीड़ रहती है। इसके अलावा, स्थानीय लोग और सेनानी इस बांध की देखभाल और सुरक्षा में हमेशा सक्रिय रहते हैं, लेकिन प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही ने बांध और उसकी नहरों की स्थिति को बिगाड़ दिया है।देवेंद्रनगर बांध जिला पन्ना मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर और देवेंद्रनगर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह बांध देवेंद्रनगर के उत्तर में स्थित है और इस बांध की नहरें क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पानी पहुंचाती हैं, लेकिन अब इनकी स्थिति पूरी तरह से खराब हो चुकी है।सिंचाई विभाग की महिला अधिकारी, जो एक सब इंजीनियर के रूप में यहां पदस्थ हैं, उनकी शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही भी एक बड़ी समस्या बन गई है। वे महीने में केवल दो बार ही देवेंद्रनगर आती हैं, और उनके इस लापरवाह रवैये के कारण बांध और नहरों का रखरखाव और सफाई सही तरीके से नहीं हो पा रही है। अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण अब यह क्षेत्र गंभीर जल संकट का सामना कर सकता है, जिससे किसानों और स्थानीय लोगों को परेशानी हो सकती है।

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